Delhi में अरुणा आसफ अली मार्ग के जाम से मिलेगी मुक्ति, सरकार बनाएगी एलिवेटेड कॉरिडोर

Delhi: दिल्ली के लोगों को अब अरुणा आसफ अली मार्ग पर लगने वाले भारी जाम से जल्द राहत मिल सकती है। दिल्ली सरकार ने इस सड़क पर एक एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने की योजना तैयार की है। इसके लिए सरकार ने फिजिबिलिटी स्टडी यानी व्यवहार्

Delhi: दिल्ली के लोगों को अब अरुणा आसफ अली मार्ग पर लगने वाले भारी जाम से जल्द राहत मिल सकती है। दिल्ली सरकार ने इस सड़क पर एक एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने की योजना तैयार की है। इसके लिए सरकार ने फिजिबिलिटी स्टडी यानी व्यवहार्यता अध्ययन को मंजूरी दे दी है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह प्रोजेक्ट कितनी आसानी से और सही तरीके से पूरा होगा।

पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट (PWD) ने इस स्टडी के लिए करीब 1.97 करोड़ रुपये का बजट पास किया है। इस प्रोजेक्ट का मुख्य मकसद सड़क के उन हिस्सों को ठीक करना है जहाँ गाड़ियाँ घंटों फंसी रहती हैं। यह कॉरिडोर लगभग 4 से 6 किलोमीटर लंबा होगा, जिससे यह पूरा रास्ता सिग्नल-फ्री हो जाएगा। इससे न केवल लोगों का समय बचेगा, बल्कि पेट्रोल-डीजल की खपत और प्रदूषण में भी कमी आएगी।

यह सड़क मेहरौली-महिपालपुर रोड को बाहरी रिंग रोड से जोड़ती है और वसंत कुंज, किशनगढ़ और कुतुब इंस्टीट्यूशनल एरिया जैसे इलाकों से होकर गुजरती है। खासतौर पर फोर्टिस हॉस्पिटल के पास का सिग्नल, किशनगढ़ गांव के चौराहे, JNU, संजय वन और बेर सराय जैसे पॉइंट्स पर बहुत ज्यादा ट्रैफिक रहता है। सरकार इन सभी चोकपॉइंट्स को खत्म कर इस रास्ते को एक मॉडल कॉरिडोर बनाना चाहती है, जो हरा-भरा हो और जहाँ पैदल चलने वालों के लिए भी अच्छी सुविधा हो।

इस योजना की शुरुआत मई में हुई थी जब लेफ्टिनेंट गवर्नर TS Sandhu ने एक रिव्यू मीटिंग की थी। इस मीटिंग में अरुणा आसफ अली मार्ग समेत पांच ऐसे रास्तों की पहचान की गई थी जहाँ ट्रैफिक का दबाव बहुत ज्यादा है। PWD मंत्री परवेश वर्मा ने भी इस प्रोजेक्ट के फायदों के बारे में बात की है। अब PWD एक कंसल्टेंट की मदद से तकनीकी पहलुओं, जमीन की जरूरत और कुल लागत की जांच करेगा, जिसके बाद फाइनल डिजाइन तैयार किया जाएगा।