Delhi में बिजली कंपनियों के 38,500 करोड़ रुपये के हिसाब की होगी जांच, सरकार ने CAG ऑडिट के दिए आदेश

Delhi: दिल्ली सरकार ने राजधानी की तीन बड़ी बिजली वितरण कंपनियों (discoms) के खातों की गहन जांच कराने का फैसला किया है। सरकार ने इसके लिए Comptroller and Auditor General (CAG) को ऑडिट करने का औपचारिक आदेश जारी कर दिया है।

Delhi: दिल्ली सरकार ने राजधानी की तीन बड़ी बिजली वितरण कंपनियों (discoms) के खातों की गहन जांच कराने का फैसला किया है। सरकार ने इसके लिए Comptroller and Auditor General (CAG) को ऑडिट करने का औपचारिक आदेश जारी कर दिया है। यह पूरी कार्रवाई 38,500 करोड़ रुपये के पेंडिंग रेगुलेटरी एसेट्स (RA) के मामले में की जा रही है, जिसका बोझ अंततः आम बिजली उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ता है।

बिजली विभाग ने बुधवार, 1 जुलाई 2026 को इस ऑडिट का आदेश जारी किया। इस जांच के दायरे में BSES Rajdhani Power Ltd. (BRPL), BSES Yamuna Power Ltd. (BYPL) और Tata Power Delhi Distribution Ltd. (TPDDL) जैसी कंपनियां आएंगी। यह कदम सुप्रीम कोर्ट के 6 अगस्त 2025 के उस फैसले के बाद उठाया गया है, जिसमें इन कंपनियों के अनरिकवर्ड रेगुलेटरी एसेट्स की सख्त जांच करने को कहा गया था।

दिल्ली के बिजली मंत्री Ashish Sood ने गुरुवार, 2 जुलाई 2026 को इस फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह दिल्ली के हर बिजली उपभोक्ता और ईमानदार टैक्सपेयर की जीत है। मंत्री के मुताबिक, इस ऑडिट से यह साफ होगा कि 38,500 करोड़ रुपये का यह भारी-भरकम फंड कैसे जमा हुआ और इसका फायदा किसे मिला। उन्होंने जोर दिया कि किसी भी आम नागरिक को गलत फैसलों या खास लोगों को दिए गए फायदों का बोझ नहीं उठाना चाहिए।

इस ऑडिट से जुड़ी मुख्य जानकारियां नीचे दी गई हैं:

विवरण जानकारी
ऑडिट करने वाली संस्था CAG (भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक)
कुल पेंडिंग राशि (RA) 38,500 करोड़ रुपये
जांच के दायरे में कंपनियां BRPL, BYPL और TPDDL
ऑडिट की समय सीमा 3 महीने (CAG इसे बढ़ा भी सकते हैं)
कानूनी आधार CAG एक्ट 1971 की धारा 20(1) और 20(3)
सुप्रीम कोर्ट का आदेश 6 अगस्त 2025

रेगुलेटरी एसेट्स (RA) दरअसल वो खर्च होते हैं जो बिजली कंपनियां उठाती हैं, लेकिन उन्हें टैरिफ या सब्सिडी के जरिए तुरंत वसूल नहीं कर पातीं। बाद में इन खर्चों को सरचार्ज के रूप में ग्राहकों के बिजली बिलों में जोड़कर वसूला जाता है। इस पूरे मामले पर BSES के प्रवक्ता ने कहा कि ऑडिट का सवाल अभी अदालतों में है, इसलिए इस पर कोई टिप्पणी करना सही नहीं होगा।