Delhi: दिल्ली सरकार शहर में बिजनेस और उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए एक नई सिटी लॉजिस्टिक्स योजना और वेयरहाउसिंग पॉलिसी लेकर आ रही है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 16 मई 2026 को बताया कि दिल्ली ने LEADS 2025 इंडेक्स में सब
Delhi: दिल्ली सरकार शहर में बिजनेस और उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए एक नई सिटी लॉजिस्टिक्स योजना और वेयरहाउसिंग पॉलिसी लेकर आ रही है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 16 मई 2026 को बताया कि दिल्ली ने LEADS 2025 इंडेक्स में सबसे ऊंची ‘एक्सेंपलर’ रैंकिंग हासिल की है। इस नई पहल से व्यापारियों को कागजी कार्रवाई से राहत मिलेगी और माल की आवाजाही तेज होगी।
नई लॉजिस्टिक्स योजना से व्यापारियों को क्या फायदा होगा?
सरकार ने प्रधानमंत्री गति शक्ति योजना के तहत सिटी लॉजिस्टिक्स प्लान को मंजूरी दे दी है, जिसे जल्द ही अधिसूचित किया जाएगा। अब नए बिजनेस शुरू करने या निवेश के लिए सिंगल विंडो सिस्टम के जरिए सभी सरकारी मंजूरियां आसानी से मिल जाएंगी। पीडब्ल्यूडी ने सड़कों को गड्ढा मुक्त बनाने का अभियान चलाया है, जिससे ट्रांसपोर्ट आसान होगा। ई-कॉमर्स, कपड़ों और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे सेक्टर को इसका सीधा लाभ मिलेगा।
लॉजिस्टिक्स नीति 2025 की मुख्य बातें क्या हैं?
वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स नीति 2025 अपने आखिरी चरण में है। इसके तहत शहर के बाहरी इलाकों में बड़े वितरण केंद्र और बाजारों के पास छोटे गोदाम बनाए जाएंगे। सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों और सौर ऊर्जा आधारित वेयरहाउसिंग को बढ़ावा देगी। माल की निगरानी के लिए AI और डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जाएगा ताकि रूट बेहतर हो सकें और प्रदूषण कम हो।
| सुविधा/लाभ |
विवरण |
| पूंजी सब्सिडी |
लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए 50% तक सब्सिडी (अधिकतम ₹50 करोड़) |
| कौशल विकास |
प्रति कर्मचारी ₹5,000 तक का प्रोत्साहन |
| डिजिटल सिस्टम |
ULIP प्लेटफॉर्म के जरिए रियल-टाइम निगरानी |
| इंफ्रास्ट्रक्चर |
ट्रक टर्मिनल, पार्किंग हब और कोल्ड स्टोरेज का निर्माण |
Frequently Asked Questions (FAQs)
LEADS 2025 इंडेक्स में दिल्ली की क्या रैंकिंग रही?
दिल्ली ने LEADS 2025 इंडेक्स में सर्वोच्च ‘एक्सेंपलर’ श्रेणी हासिल की है, जो 2023 और 2024 की ‘अचीवर’ श्रेणी से बड़ी उपलब्धि है।
व्यापारियों के लिए सब्सिडी का क्या प्रावधान है?
लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए कम ब्याज पर 50% तक पूंजी सब्सिडी दी जा सकती है, जिसकी अधिकतम सीमा ₹50 करोड़ है।