Delhi में मानसून से पहले जलभराव रोकने की तैयारी, 448 हॉटस्पॉट की पहचान कर तैनात किए गए पंप

Delhi: राजधानी दिल्ली में मानसून की बारिश से पहले सरकार ने जलभराव की समस्या से निपटने के लिए कमर कस ली है। दिल्ली सरकार और पीडब्ल्यूडी ने मिलकर शहर के 448 ऐसे संवेदनशील इलाकों की पहचान की है जहाँ अक्सर पानी भर जाता है। प

Delhi: राजधानी दिल्ली में मानसून की बारिश से पहले सरकार ने जलभराव की समस्या से निपटने के लिए कमर कस ली है। दिल्ली सरकार और पीडब्ल्यूडी ने मिलकर शहर के 448 ऐसे संवेदनशील इलाकों की पहचान की है जहाँ अक्सर पानी भर जाता है। प्रशासन ने इन हॉटस्पॉट्स पर नजर रखने के लिए विशेष टीमें और पंप तैनात किए हैं ताकि आम जनता को ट्रैफिक जाम और जलभराव की परेशानी न हो।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस संबंध में ‘फ्लड कंट्रोल ऑर्डर-2026’ जारी किया है। इस आदेश के तहत हर जलभराव वाले बिंदु पर एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है, जो उस इलाके को पानी से मुक्त रखने के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार होगा। साथ ही, मानसून से पहले दिल्ली के नालों से रिकॉर्ड 34 लाख मीट्रिक टन गाद निकाली गई है। सरकार ने लोगों से अपील की है कि अगर उन्हें कोई नाला गंदा दिखे तो वे ‘एमसीडी 311’ ऐप पर इसकी शिकायत करें।

पीडब्ल्यूडी और ट्रैफिक पुलिस ने शहर के अलग-अलग जोन में संवेदनशील बिंदुओं का बंटवारा किया है। इनमें पूर्वी जोन में 177, दक्षिणी जोन में 147 और उत्तरी जोन में 124 बिंदु शामिल हैं। पीडब्ल्यूडी ने दावा किया है कि 445 संवेदनशील स्थानों में से 335 पर इंतजाम पूरे हो चुके हैं। दक्षिण-पश्चिम और पूर्वी दिल्ली के 20 खास इलाकों में ट्रैक्टर पंप लगाए गए हैं, जो एक घंटे में 200 घन मीटर पानी निकालने की क्षमता रखते हैं।

प्रगति टनल और मिंटो ब्रिज जैसे प्रमुख अंडरपास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मिंटो ब्रिज के लिए एक नया मैनेजमेंट सिस्टम लगाया जा रहा है, जिससे पानी भरने की स्थिति में तुरंत अलर्ट मिल सकेगा। इसके अलावा, 15 अक्टूबर 2026 तक एक सेंट्रल फ्लड कंट्रोल रूम सक्रिय रहेगा, जो सभी विभागों के बीच तालमेल बिठाएगा। यमुना नदी और नजफगढ़ ड्रेन के जलस्तर पर नजर रखने के लिए तीन चरणों वाली चेतावनी प्रणाली भी तैयार की गई है।

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, अल नीनो प्रभाव की वजह से इस साल बारिश का वितरण असमान रह सकता है और मानसून जुलाई के पहले हफ्ते तक भी पहुँच सकता है। प्रशासन को स्काईमेट वेदर द्वारा 24 से 48 घंटे पहले भारी बारिश की चेतावनी दी जाएगी, जिससे समय रहते तैयारी की जा सके।