Delhi में 500 गज से बड़े निर्माण स्थलों की AI से होगी निगरानी, धूल फैलाने वालों पर होगी कड़ी कार्रवाई
Delhi: दिल्ली सरकार ने शहर में बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिए एक नया कदम उठाया है। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) ने AI आधारित ‘DUST Portal 2.0’ लॉन्च किया है। इस पोर्टल के जरिए अब 500 वर्ग गज से बड़े सभ
Delhi: दिल्ली सरकार ने शहर में बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिए एक नया कदम उठाया है। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) ने AI आधारित ‘DUST Portal 2.0’ लॉन्च किया है। इस पोर्टल के जरिए अब 500 वर्ग गज से बड़े सभी निर्माण स्थलों की निगरानी की जाएगी ताकि धूल से होने वाले प्रदूषण को कम किया जा सके।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 13 जुलाई 2026 को इस पोर्टल की शुरुआत की पुष्टि की। दरअसल, इस सिस्टम को DPCC ने 9 जुलाई 2026 को रोल आउट किया था। पर्यावरण मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा ने बताया कि यह पोर्टल प्रदूषण नियंत्रण को ज्यादा पारदर्शी और जवाबदेह बनाएगा। उनका कहना है कि दिल्ली में विकास के काम जरूर हों, लेकिन इससे लोगों की सेहत से समझौता नहीं किया जा सकता।
नियमों के मुताबिक, जिन निर्माण प्रोजेक्ट्स का प्लॉट एरिया 500 वर्ग मीटर या उससे ज्यादा है, उन्हें इस पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी होगा। इन प्रोजेक्ट्स को हर 15 दिन में एक सेल्फ-ऑडिट रिपोर्ट देनी होगी। इस रिपोर्ट में 12 अलग-अलग मानकों की जांच होगी, जिसमें एंटी-डस्ट नेट का इस्तेमाल, पानी का छिड़काव, निर्माण सामग्री को ढककर रखना और एंटी-स्मॉग गन लगाना शामिल है।
| मानक/सुविधा | जरूरी नियम |
|---|---|
| निगरानी | लाइव CCTV फीड और GIS मैपिंग अनिवार्य |
| सेंसर | PM2.5 और PM10 एयर क्वालिटी सेंसर लगाना होगा |
| एंटी-स्मॉग गन | 5,000-10,000 वर्ग मीटर के लिए 1 और 20,000 वर्ग मीटर से ज्यादा के लिए 4 गन |
| रिपोर्टिंग | हर 15 दिन में सेल्फ-ऑडिट रिपोर्ट जमा करना जरूरी |
| अलर्ट सिस्टम | येलो (चेतावनी), ऑरेंज (उल्लंघन) और रेड (गंभीर उल्लंघन) अलर्ट |
अगर कोई निर्माण स्थल रिपोर्ट जमा करने में देरी करता है या नियमों का पालन नहीं करता है, तो DPCC उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी करेगा। इस पूरे सिस्टम को बनाने में National e-Governance Division (NeGD) ने मदद की है। साथ ही Geospatial Delhi Limited (GSDL) को ड्रोन और सैटेलाइट तस्वीरों के जरिए अवैध निर्माण पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।