Delhi में धूल प्रदूषण रोकने के लिए AI का इस्तेमाल, 360 डिग्री कैमरों से होगी निर्माण स्थलों की निगरानी
Delhi: दिल्ली सरकार ने शहर की हवा को साफ करने के लिए एक नया कदम उठाया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोमवार, 13 जुलाई 2026 को AI-आधारित ‘डस्ट पोर्टल 2.0’ लॉन्च किया। इस सिस्टम के जरिए अब निर्माण स्थलों पर उड़
Delhi: दिल्ली सरकार ने शहर की हवा को साफ करने के लिए एक नया कदम उठाया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोमवार, 13 जुलाई 2026 को AI-आधारित ‘डस्ट पोर्टल 2.0’ लॉन्च किया। इस सिस्टम के जरिए अब निर्माण स्थलों पर उड़ने वाली धूल पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की नजर रहेगी, जिससे प्रदूषण फैलाने वालों पर नकेल कसी जा सकेगी।
इस नए पोर्टल में 360 डिग्री कैमरों, GIS मैपिंग और सेंसर का इस्तेमाल किया गया है। यह तकनीक निर्माण और विध्वंस स्थलों की रियल-टाइम निगरानी करेगी। अगर किसी साइट पर धूल का स्तर ज्यादा पाया गया, तो सिस्टम अपने आप अलर्ट जारी कर देगा। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) नियम तोड़ने वालों को सीधे डिजिटल नोटिस भेजेगी और उनके खिलाफ कार्रवाई करेगी।
पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने बताया कि यह पोर्टल निर्माण गतिविधियों की निगरानी और प्रवर्तन में सुधार लाएगा। सरकार ने इसके लिए विश्व बैंक के साथ ‘स्वच्छ हवा, स्वस्थ दिल्ली’ पहल के तहत सात साल की योजना बनाई है। दिल्ली में लगभग 1,800 निर्माण स्थल हैं, जिनमें से 800 को इस नई निगरानी प्रणाली से जोड़ दिया गया है। 500 वर्ग मीटर या उससे बड़े सभी प्लॉटों के लिए इस पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी होगा।
| सुविधा/नियम | विवरण |
|---|---|
| निगरानी तकनीक | AI, 360-डिग्री कैमरे, GIS मैपिंग और PM2.5/PM10 सेंसर |
| अलर्ट सिस्टम | प्रदूषण स्तर के आधार पर पीला, नारंगी और लाल अलर्ट |
| अनिवार्य नियम | 100 GSM मोटाई वाले हरे जालों का उपयोग और पानी का छिड़काव |
| अनुपालन रिपोर्ट | प्रोजेक्ट प्रस्तावक को हर 15 दिन में डिजिटल रिपोर्ट अपलोड करनी होगी |
| पहुंच | वेब पोर्टल और मोबाइल एप्लिकेशन दोनों उपलब्ध |
| नियमों में बदलाव | स्व-अनुपालन उपायों की सूची 27 से घटाकर 12 की गई |
इस बीच, 14 जुलाई 2026 को दिल्ली-NCR का औसत AQI 294 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में है। विशेषज्ञों के मुताबिक, पड़ोसी देशों से आने वाली धूल और मानसून की कमी इसकी वजह है। हालांकि, CAQM को उम्मीद है कि 15 जुलाई के बाद मानसून सक्रिय होने से हवा की गुणवत्ता में सुधार होगा।