Delhi में झुग्गीवासियों को मिलेंगे पक्के मकान और श्रमिकों को मुफ्त इलाज, रेखा गुप्ता सरकार ने लिए दो बड़े फैसले

Delhi: दिल्ली की रेखा गुप्ता सरकार ने शहर के गरीब और मजदूर वर्ग के लिए दो बहुत बड़ी घोषणाएं की हैं। मंगलवार को लिए गए इन फैसलों से लाखों परिवारों को अपना पक्का घर मिलेगा और बीमारी के समय मुफ्त इलाज की सुविधा मिलेगी। सरका

Delhi: दिल्ली की रेखा गुप्ता सरकार ने शहर के गरीब और मजदूर वर्ग के लिए दो बहुत बड़ी घोषणाएं की हैं। मंगलवार को लिए गए इन फैसलों से लाखों परिवारों को अपना पक्का घर मिलेगा और बीमारी के समय मुफ्त इलाज की सुविधा मिलेगी। सरकार ने मकान और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी इन योजनाओं को जल्द लागू करने की तैयारी कर ली है।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (DUSIB) की 36वीं बैठक में झुग्गीवासियों के लिए बड़ा फैसला लिया गया। अब पुनर्वास के लिए कट-ऑफ तिथि को बढ़ाकर 1 जनवरी 2025 कर दिया गया है, जबकि पहले यह 2015 थी। इस बदलाव के बाद करीब 4 से 5 लाख लोग इस योजना का लाभ ले सकेंगे। इसमें यमुना किनारे की उन 91 कॉलोनियों के लोग भी शामिल हैं, जिन्हें अब बुलडोजर की कार्रवाई का डर नहीं रहेगा। पात्र परिवारों को बुनियादी सुविधाओं वाले बहुमंजिला फ्लैट दिए जाएंगे और कोशिश होगी कि उन्हें उनके पुराने घर के आसपास ही बसाया जाए। इन कॉलोनियों में स्कूल, आंगनवाड़ी, स्वास्थ्य केंद्र और बच्चों के लिए खेल के मैदान भी बनाए जाएंगे। यह पूरा काम पीपीपी मॉडल के जरिए होगा और यह केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा तय की गई ‘दिल्ली स्लम एवं झुग्गी झोपड़ी पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन नीति, 2026’ के हिसाब से होगा।

मकानों के साथ-साथ दिल्ली कैबिनेट ने ‘दिल्ली भवन निर्माण श्रमिक स्वास्थ्य योजना’ को भी मंजूरी दे दी है। इस योजना के जरिए राजधानी के लगभग 2.70 लाख रजिस्टर्ड निर्माण श्रमिकों और उनके परिवार के सदस्यों (पति/पत्नी, बच्चे और माता-पिता) को कैशलेस इलाज मिलेगा। कुल मिलाकर करीब 10 लाख लोगों को इस सुविधा का फायदा मिलेगा।

सुविधा विवरण
इलाज की सीमा (श्रमिक) 2 लाख रुपये तक मुफ्त
इलाज की सीमा (परिवार) 10 लाख रुपये तक मुफ्त
सेवाएं OPD, IPD, लैब टेस्ट और इमरजेंसी सहायता
अन्य सुविधाएं सालाना फ्री हेल्थ चेक-अप और मोबाइल मेडिकल यूनिट
सरकारी खर्च सालाना लगभग 200 करोड़ रुपये

मजदूरों की मदद के लिए सरकार निर्माण स्थलों और श्रमिक इलाकों में मोबाइल मेडिकल यूनिट तैनात करेगी। साथ ही एक 24 घंटे चलने वाली टोल-फ्री हेल्पलाइन भी शुरू की जाएगी। पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सभी लाभार्थियों के डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड तैयार किए जाएंगे ताकि इलाज में कोई दिक्कत न आए।