Delhi में बिजली चोरी के खिलाफ सरकार सख्त, अवैध कनेक्शन काटने और भारी जुर्माने के आदेश

Delhi: दिल्ली सरकार ने शहर के उन इलाकों में बिजली चोरी रोकने के लिए बड़ा अभियान शुरू किया है जहां बिजली कंपनियों को सबसे ज्यादा नुकसान हो रहा है। बिजली मंत्री Ashish Sood ने सभी बिजली वितरण कंपनियों (discoms) और जांच एजे

Delhi: दिल्ली सरकार ने शहर के उन इलाकों में बिजली चोरी रोकने के लिए बड़ा अभियान शुरू किया है जहां बिजली कंपनियों को सबसे ज्यादा नुकसान हो रहा है। बिजली मंत्री Ashish Sood ने सभी बिजली वितरण कंपनियों (discoms) और जांच एजेंसियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे अवैध कनेक्शन और चोरी कर रहे कमर्शियल संस्थानों पर कड़ी कार्रवाई करें। इस कदम का मकसद ईमानदार उपभोक्ताओं को बचाना और पूरे दिल्ली में बिना रुकावट बिजली की सप्लाई सुनिश्चित करना है।

इस अभियान के तहत बिजली मंत्री ने चेतावनी दी है कि जो कमर्शियल संस्थान बिजली चोरी में शामिल पाए जाएंगे, उनका कनेक्शन तुरंत काट दिया जाएगा। साथ ही उन पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा और उनके परिसर को सील भी किया जा सकता है। यह पूरी कार्रवाई Electricity Act 2003 की धारा 135 और 138 के तहत की जा रही है। नियमों के मुताबिक बिजली चोरी करने वालों को भारी जुर्माना भरना पड़ सकता है और उन्हें तीन साल तक की जेल भी हो सकती है।

हाल ही में पश्चिम दिल्ली के मुंडका डिवीजन के कमरुद्दीन नगर इलाके में इस कार्रवाई के बड़े नतीजे सामने आए हैं। यह इलाका बिजली चोरी के कारण हाई-लॉस एरिया में आता था, जहां सालाना करीब 24.4 करोड़ रुपये का वित्तीय नुकसान हो रहा था। छापेमारी के दौरान यहां कई अवैध कमर्शियल और इंडस्ट्रियल यूनिट्स मिलीं, जो ऊपर से सीधे तार डालकर बिजली चोरी कर रही थीं। इस कार्रवाई से इलाके में रोजाना करीब 34,000 यूनिट बिजली की चोरी रुकी है, जिससे कुल 1 करोड़ यूनिट से ज्यादा बिजली बचाई गई है।

भविष्य में चोरी रोकने के लिए सरकार अब पुराने ओवरहेड तारों को हटाकर उनकी जगह चोरी-रोधी आर्मर्ड केबल (armored cables) लगाएगी। साथ ही, छापेमारी के दौरान पुलिस बल की तैनाती रहेगी और संदिग्ध बिजली खपत का पता लगाने के लिए डेटा एनालिटिक्स का इस्तेमाल किया जाएगा। इस मामले में Tata Power-DDL, BSES Rajdhani और BSES Yamuna जैसी कंपनियां मिलकर काम कर रही हैं। इससे पहले सुल्तानपुरी में बिजली चोरी के एक मामले में विशेष अदालत ने दोषी को छह महीने की जेल और 1.88 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था।