Delhi में प्राइवेट स्कूल खोलना होगा आसान, सरकार ने बदला मान्यता का नियम, अब नहीं चाहिए होगा Essentiality Certificate
Delhi: दिल्ली सरकार ने घनी आबादी वाले इलाकों में प्राइवेट स्कूल खोलने की प्रक्रिया को काफी सरल कर दिया है। अब स्कूलों को मान्यता दिलाने के लिए पुराने और कठिन नियमों को हटाकर नए बदलाव किए गए हैं। इस कदम से शहर के रिहायशी
Delhi: दिल्ली सरकार ने घनी आबादी वाले इलाकों में प्राइवेट स्कूल खोलने की प्रक्रिया को काफी सरल कर दिया है। अब स्कूलों को मान्यता दिलाने के लिए पुराने और कठिन नियमों को हटाकर नए बदलाव किए गए हैं। इस कदम से शहर के रिहायशी इलाकों में ज्यादा से ज्यादा अच्छे स्कूल खुल सकेंगे और कागजी कार्रवाई में होने वाली देरी कम होगी।
सरकार ने दशकों पुराने ‘Essentiality Certificate’ की अनिवार्यता को खत्म कर दिया है। अब प्राइवेट स्कूल चलाने वाले लोग खुद ही सर्टिफाई (self-certification) कर सकेंगे कि वे बुनियादी ढांचे, सुरक्षा और स्टाफ से जुड़े सभी नियमों का पालन कर रहे हैं। पहले सरकार यह तय करती थी कि किसी खास इलाके में स्कूल की जरूरत है या नहीं, लेकिन अब यह शर्त हटा दी गई है। साथ ही, दिल्ली की भीड़भाड़ को देखते हुए जमीन की न्यूनतम जरूरत में भी ढील दी गई है ताकि स्कूल लोगों के घरों के करीब खुल सकें।
शिक्षा मंत्री Ashish Sood ने बताया कि अब पूरा ध्यान फालतू की कागजी कार्रवाई के बजाय अच्छी बिल्डिंग, योग्य टीचर और बच्चों और टीचर के सही अनुपात पर होगा। उन्होंने कहा कि ये बदलाव RTE Act 2009 के हिसाब से किए गए हैं ताकि मान्यता की प्रक्रिया पारदर्शी रहे। Directorate of Education (DoE) ने इस संबंध में 28 नए फॉर्म (proformas) भी जारी किए हैं, जिनमें कानूनी मालिकाना हक, सुरक्षा और पढ़ाई के स्तर से जुड़े दस्तावेज जमा करने होंगे।
हालांकि, कुछ एक्टिविस्ट ने इस फैसले पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि इससे शिक्षा का निजीकरण बढ़ेगा और सरकारी स्कूलों की हालत पर असर पड़ सकता है। उन्हें यह डर भी है कि जमीन के नियमों में ढील देने से कम सुविधाओं वाले स्कूल भी मान्यता पा सकते हैं।