Delhi की 270 किमी सड़कों की होगी मरम्मत, सरकार ने ₹658 करोड़ के प्रोजेक्ट को दी मंजूरी
Delhi: दिल्ली के लोगों को जल्द ही टूटी सड़कों और गड्ढों से राहत मिलने वाली है। दिल्ली सरकार ने शहर की 270 किलोमीटर से ज्यादा सड़कों को मजबूत बनाने के लिए 657.9 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी है। यह फैसला मुख्यम
Delhi: दिल्ली के लोगों को जल्द ही टूटी सड़कों और गड्ढों से राहत मिलने वाली है। दिल्ली सरकार ने शहर की 270 किलोमीटर से ज्यादा सड़कों को मजबूत बनाने के लिए 657.9 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी है। यह फैसला मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई Expenditure Finance Committee (EFC) की बैठक में लिया गया, जिसमें PWD मंत्री परवेश वर्मा और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।
इस योजना के तहत पूर्वी, उत्तरी और दक्षिणी दिल्ली की सड़कों का कायाकल्प किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य अक्टूबर 2026 तक इन सभी कामों को पूरा करना है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि सरकार ऐसी सड़कें बनाना चाहती है जो लंबे समय तक चलें और काम में पूरी पारदर्शिता रहे। अब ठेकेदारों की जवाबदेही भी तय की गई है, क्योंकि सभी प्रोजेक्ट्स में पांच साल का Defect Liability Period (DLP) होगा। इसका मतलब है कि सड़क बनने के बाद अगले पांच साल तक उसकी देखरेख ठेकेदार को करनी होगी और अगर इस दौरान कोई गड्ढा होता है, तो उसे 48 घंटे के भीतर ठीक करना होगा।
काम की क्वालिटी बनाए रखने के लिए सरकार ने कड़े नियम बनाए हैं। प्रोग्रेस ट्रैक करने के लिए काम से पहले, काम के दौरान और काम पूरा होने के बाद की Geo-tagged फोटो अपलोड करनी होगी। साथ ही, CSIR-CRRI और School of Planning and Architecture जैसी संस्थाएं स्वतंत्र ऑडिट करेंगी ताकि निर्माण की गुणवत्ता जांची जा सके। टेंडर प्रक्रिया में भी बदलाव किया गया है, अब सड़क-वार टेंडर के बजाय जोन-वार कंपोजिट मॉडल अपनाया जाएगा, जिससे बड़ी कंपनियां आधुनिक मशीनों के साथ काम कर सकेंगी।
| जोन (Zone) | बजट (करोड़ ₹) | सड़क की लंबाई (किमी) |
|---|---|---|
| पूर्वी जोन (East) | 147.08 | 58.29 |
| उत्तरी जोन (North) | 247.31 | 104.42 |
| दक्षिणी जोन (South) | 263.61 | 107.92 |
इन सड़कों पर कोल्ड मिलिंग के जरिए पुरानी सतह हटाई जाएगी और फिर DBM और बिटुमिनस कंक्रीट की परतें बिछाई जाएंगी। इसके अलावा रोड मार्किंग, साइन बोर्ड, रिफ्लेक्टर, सेफ्टी बैरियर और जल निकासी के लिए कर्ब चैनल का काम भी होगा। यह पूरा प्रोजेक्ट CAQM के नियमों के अनुसार होगा ताकि धूल कम उड़े और पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे।