Delhi में 10 साल की बच्ची से रेप और हत्या, फुटपाथ पर रहने वाले बच्चों की सुरक्षा पर उठे सवाल

Delhi: राजधानी दिल्ली में एक 10 साल की बच्ची के साथ बलात्कार और हत्या की दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है. बच्ची का अपहरण कर उसके साथ दरिंदगी की गई और फिर उसकी जान ले ली गई. इस घटना ने शहर के फुटपाथों पर रहने वाले हजा

Delhi: राजधानी दिल्ली में एक 10 साल की बच्ची के साथ बलात्कार और हत्या की दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है. बच्ची का अपहरण कर उसके साथ दरिंदगी की गई और फिर उसकी जान ले ली गई. इस घटना ने शहर के फुटपाथों पर रहने वाले हजारों बच्चों की सुरक्षा को लेकर एक बड़ी बहस छेड़ दी है कि आखिर ये बच्चे कितने सुरक्षित हैं.

यह घटना 22-23 जून 2026 के आसपास हुई थी. दिल्ली पुलिस ने फुर्ती दिखाते हुए वारदात के कुछ ही घंटों के भीतर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया. पकड़ा गया आरोपी बाशु कुमार सिंह गुरुग्राम का रहने वाला एक 29 वर्षीय कैब ड्राइवर है. पुलिस जांच में पता चला है कि आरोपी का बिहार में पुराना आपराधिक रिकॉर्ड रहा है. जब पुलिस उसे घटना वाली जगह पर ले जा रही थी, तब उसने भागने की कोशिश की और मुठभेड़ के दौरान वह घायल हो गया.

इस घटना ने उन सरकारी आंकड़ों की याद दिला दी है जो फुटपाथ पर रहने वाले बच्चों की बदहाली बयां करते हैं. NCPCR के पोर्टल के मुताबिक साल 2022 और 2023 के बीच सड़कों पर रहने वाले 22,900 से ज्यादा बच्चों की पहचान हुई थी. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने पहले यह बात कही थी कि वास्तविक संख्या 15 से 20 लाख के बीच हो सकती है. कोर्ट ने 25 अप्रैल 2022 को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को इन बच्चों के पुनर्वास के लिए NCPCR के नियमों को लागू करने का आदेश दिया था.

बच्चों की सुरक्षा को लेकर अब प्रशासन सख्त कदम उठा रहा है. जुलाई 2026 से दिल्ली शिक्षा निदेशालय और स्थानीय पुलिस की टीमें स्कूलों का औचक निरीक्षण करेंगी. इसका मकसद यह देखना है कि स्कूलों में पॉक्सो एक्ट और अन्य सुरक्षा नियमों का पालन हो रहा है या नहीं. सभी स्कूलों को 15 दिनों के भीतर अपनी सुरक्षा रिपोर्ट जमा करनी होगी.

दूसरी तरफ, फुटपाथों की खराब हालत पर भी सवाल उठ रहे हैं. केंद्रीय लोक निर्माण विभाग के पूर्व विशेष महानिदेशक अनिल पंडित ने कहा कि दिल्ली-एनसीआर में फुटपाथों की बुरी स्थिति और पैदल चलने वालों की अनदेखी प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्टाचार का नतीजा है. इसी बीच 19 जून 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम टिप्पणी की कि फुटपाथ पर चलना नागरिकों का मौलिक अधिकार है और यह वाहनों के अधिकार से ऊपर है.