Delhi: दिल्ली के गाजीपुर लैंडफिल साइट को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) में एक चौंकाने वाली रिपोर्ट पेश की गई है। कोर्ट कमिश्नर कात्यायनी की इस रिपोर्ट के मुताबिक, गाजीपुर में हर दिन 1,700 मीट्रिक टन ताजा कचरा सीधे तौ
Delhi: दिल्ली के गाजीपुर लैंडफिल साइट को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) में एक चौंकाने वाली रिपोर्ट पेश की गई है। कोर्ट कमिश्नर कात्यायनी की इस रिपोर्ट के मुताबिक, गाजीपुर में हर दिन 1,700 मीट्रिक टन ताजा कचरा सीधे तौर पर डंप किया जा रहा है। यह रिपोर्ट बताती है कि कचरे के निपटारे के लिए लगाए गए सिस्टम उम्मीद के मुताबिक काम नहीं कर रहे हैं, जिससे दिल्ली और आसपास रहने वाले लोगों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं।
गाजीपुर प्लांट में कचरे के निपटारे की क्या है स्थिति?
रिपोर्ट के अनुसार गाजीपुर साइट पर हर दिन करीब 2,400 से 2,600 मीट्रिक टन ताजा कचरा पहुंचता है। इसमें से वहां लगा वेस्ट-टू-एनर्जी (WTE) प्लांट केवल 700 से 1,000 मीट्रिक टन कचरे को ही प्रोसेस कर पाता है। बाकी बचा हुआ 1,700 टन कचरा सीधे लैंडफिल में डाल दिया जाता है। जांच में यह भी पता चला है कि साल 2025 में यह प्लांट करीब 8 महीने तक बंद रहा था, जिसकी वजह से कचरे का अंबार और ज्यादा बढ़ गया। इस प्लांट की क्षमता 1,300 मीट्रिक टन की है, लेकिन यह अपनी पूरी क्षमता पर काम नहीं कर रहा है।
नगर निगम की क्या है योजना और NGT के निर्देश?
- नगर निगम (MCD) ने लक्ष्य रखा है कि साल 2027 के अंत तक गाजीपुर लैंडफिल साइट को पूरी तरह से साफ कर दिया जाएगा।
- NGT ने अप्रैल 2024 में साइट पर लगी भीषण आग के बाद इस मामले पर खुद संज्ञान लिया था और लगातार निगरानी की जा रही है।
- कोर्ट कमिश्नर ने सलाह दी है कि कचरे के पहाड़ की ऊंचाई कितनी कम हुई है, इसकी जांच किसी तीसरे पक्ष (Third Party) से करानी चाहिए।
- साइट पर जहरीले तरल पदार्थ (Leachate) के मैनेजमेंट और मीथेन गैस से लगने वाली आग को रोकने के इंतजाम भी रिपोर्ट में नाकाफी पाए गए हैं।
- आने वाले समय में यहां एक नया प्लांट लगाने और कचरा प्रोसेसिंग के चार नए सेंटर बनाने की तैयारी चल रही है ताकि रोजाना आने वाले कचरे का निपटारा किया जा सके।