Delhi में अवैध पेड़ कटाई पर वन विभाग का सख्त एक्शन, नई SOP लागू; अब शिकायत के 2 महीने में होगी जांच

Delhi: दिल्ली के वन विभाग ने शहर के पेड़ों को बचाने के लिए एक नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) लागू की है। अब अगर कोई व्यक्ति अवैध तरीके से पेड़ काटता है, तो वन विभाग की टीम तुरंत मौके पर पहुंचकर कार्रवाई करेगी। यह नया निय

Delhi: दिल्ली के वन विभाग ने शहर के पेड़ों को बचाने के लिए एक नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) लागू की है। अब अगर कोई व्यक्ति अवैध तरीके से पेड़ काटता है, तो वन विभाग की टीम तुरंत मौके पर पहुंचकर कार्रवाई करेगी। यह नया नियम दिल्ली गजट में प्रकाशित होने के बाद से प्रभावी हो गया है और इसने पुराने सभी दिशा-निर्देशों की जगह ले ली है।

इस नई व्यवस्था के तहत अब शिकायतों के निपटारे के लिए एक समय-बद्ध तंत्र बनाया गया है। पेड़ों से जुड़े अपराधों की शिकायत मिलने के बाद अधिकतम दो महीने के भीतर जांच पूरी करनी होगी। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इसे दिल्ली के हरित आवरण को बचाने के लिए एक ऐतिहासिक फैसला बताया है। उन्होंने साफ किया है कि पेड़ों की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता है और नियमों का उल्लंघन करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।

अवैध कटाई रोकने के लिए अब त्वरित प्रतिक्रिया दल (QRT) तैनात रहेगा, जो जियो-टैग फोटो, वीडियो और सीसीटीवी फुटेज के जरिए सबूत जुटाएगा। अगर कोई व्यक्ति पेड़ काटते पकड़ा जाता है, तो इस्तेमाल किए गए औजार और वाहन तुरंत जब्त कर लिए जाएंगे। यदि आरोपी समन मिलने के बाद भी पेश नहीं होता है, तो उसके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया जा सकता है।

सुविधा/नियम विवरण
शिकायत के माध्यम टोल-फ्री हेल्पलाइन, ऑनलाइन पोर्टल, सरकारी ऐप या लिखित शिकायत
निगरानी व्यवस्था 24 घंटे संचालित वन और डिवीजन नियंत्रण कक्ष
जांच की समय सीमा शिकायत के 2 महीने के भीतर पूरी होगी जांच
सबूत जुटाना QRT द्वारा जियो-टैग फोटो, वीडियो और चश्मदीदों के बयान
कानूनी कार्रवाई निषेधाज्ञा जारी करने का अधिकार और पुलिस एफआईआर का प्रावधान
ट्रैकिंग सिस्टम शिकायतों की निगरानी के लिए समर्पित वेबसाइट का निर्माण

विभाग ने पारदर्शिता बढ़ाने के लिए मुख्यालय में एक कानूनी प्रकोष्ठ और प्रत्येक वृक्ष अधिकारी के तहत अभियोजन प्रकोष्ठ बनाने का फैसला किया है। अगर कोई संदिग्ध व्यक्ति अपनी पहचान बताने से मना करता है या भागने की कोशिश करता है, तो उसे सीधे रेंज अधिकारी के सामने पेश किया जाएगा। इसके अलावा, यदि दो वन विभागों के बीच इलाके को लेकर विवाद होता है, तो वन संरक्षक का फैसला आखिरी माना जाएगा।