Delhi में पैदल चलना हुआ मुश्किल, सुप्रीम कोर्ट ने फुटपाथ को बताया मौलिक अधिकार लेकिन जमीन पर हालात खराब
Delhi: राजधानी दिल्ली के फुटपाथों की हालत इतनी खराब हो गई है कि पैदल चलने वालों के लिए ये किसी बाधा दौड़ जैसा बन गया है। मार्केट, अस्पताल और ऑफिस वाले इलाकों में फुटपाथों पर दुकानों, गाड़ियों और रेहड़ी-पटरी वालों का कब्ज
Delhi: राजधानी दिल्ली के फुटपाथों की हालत इतनी खराब हो गई है कि पैदल चलने वालों के लिए ये किसी बाधा दौड़ जैसा बन गया है। मार्केट, अस्पताल और ऑफिस वाले इलाकों में फुटपाथों पर दुकानों, गाड़ियों और रेहड़ी-पटरी वालों का कब्जा है। इस वजह से लोगों को मजबूरन चलती सड़कों पर चलना पड़ता है, जिससे हादसों का खतरा बढ़ गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने 19 जून 2026 को एक बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा था कि साफ और सही फुटपाथ पर चलना नागरिकों का मौलिक अधिकार है। कोर्ट ने इसे संविधान के अनुच्छेद 19(1)(d) और 21 के तहत जीवन और आवाजाही के अधिकार से जोड़ा। यह फैसला एक पांच साल के बच्चे की मौत के बाद आया था, जिसके बाद जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस ए.एस. चंदुरकर की बेंच ने सरकार को पैदल चलने वालों की सुरक्षा के लिए कानून बनाने को कहा था।
प्रशासन ने इस दिशा में कुछ कदम भी उठाए हैं। 3 से 6 जून 2026 के बीच दिल्ली ट्रैफिक पुलिस और MCD ने 144 जगहों पर अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया। इस दौरान 1,264 रेहड़ी-पटरी और 1,015 अन्य अवैध ढांचे हटाए गए। साथ ही 3,123 अवैध रूप से खड़ी गाड़ियों को जब्त किया गया और 55,532 चालान काटे गए।
लेफ्टिनेंट गवर्नर तरनजीत सिंह संधू ने भी मई के अंत में पांच मुख्य रोड कॉरिडोर के पुनर्विकास की समीक्षा की थी। योजना के मुताबिक इन सड़कों को धूल मुक्त और पैदल चलने वालों के अनुकूल बनाया जाएगा, जिसमें साइकिल ट्रैक और वेंडिंग जोन शामिल होंगे। वहीं, दिल्ली हाई कोर्ट ने भी विकासपुरी जैसे इलाकों में अतिक्रमण की जांच के आदेश दिए थे, जहां पाया गया कि लाइसेंस वाले वेंडर भी तय सीमा से बाहर दुकान लगाकर रास्ता रोक रहे हैं।
कानूनी तौर पर अब स्थिति यह है कि अगर खराब बुनियादी ढांचे या टूटे फुटपाथ की वजह से किसी नागरिक को चोट लगती है, तो वह सरकारी एजेंसियों से मुआवजे की मांग कर सकता है। मार्च 2025 में हाई कोर्ट ने एक मामले में खुले मैनहोल में गिरने वाले व्यक्ति को 10 लाख रुपये का मुआवजा दिलाने का आदेश दिया था।