Delhi में फुटपाथों पर कब्जा जारी, पैदल चलने वालों की जान जोखिम में; सुप्रीम कोर्ट ने इसे बताया मौलिक अधिकार

Delhi: राजधानी दिल्ली में फुटपाथों से अतिक्रमण हटाने के सरकारी दावों का कोई खास असर नहीं दिख रहा है। फुटपाथों पर अवैध कब्जा इतना ज्यादा है कि पैदल चलने वालों को मजबूरन सड़कों पर चलना पड़ता है, जिससे आए दिन हादसे हो रहे ह

Delhi: राजधानी दिल्ली में फुटपाथों से अतिक्रमण हटाने के सरकारी दावों का कोई खास असर नहीं दिख रहा है। फुटपाथों पर अवैध कब्जा इतना ज्यादा है कि पैदल चलने वालों को मजबूरन सड़कों पर चलना पड़ता है, जिससे आए दिन हादसे हो रहे हैं और लोगों की जान जा रही है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि फुटपाथ पर सुरक्षित चलना नागरिकों का मौलिक अधिकार है।

सुप्रीम कोर्ट ने 19-20 जून 2026 को घोषणा की कि अनुच्छेद 21 और 19(1)(डी) के तहत सुरक्षित चलना जीवन और आवागमन का अधिकार है। कोर्ट ने कहा कि पैदल चलने वालों के इस अधिकार को गाड़ियों के मुकाबले प्राथमिकता मिलेगी। अगर फुटपाथ न होने से इस अधिकार का उल्लंघन होता है, तो लोग नगर निगम और शहरी विकास प्राधिकरण जैसे जिम्मेदार अधिकारियों से मुआवजे की मांग कर सकते हैं।

प्रशासनिक आंकड़ों पर गौर करें तो अतिक्रमण हटाने की रफ़्तार लगातार कम हुई है। स्पेशल टास्क फोर्स के मुताबिक, 2024 में जहाँ 5030.95 किलोमीटर फुटपाथ खाली कराए गए थे, वहीं 2025 में यह घटकर 2000.20 किलोमीटर रह गया। साल 2026 के शुरुआती पांच महीनों (जनवरी-मई) में केवल 828.80 किलोमीटर फुटपाथ ही साफ हो पाए हैं। इसी तरह जब्त की गई वस्तुओं और टो किए गए वाहनों की संख्या में भी भारी गिरावट आई है।

साल खाली कराए गए फुटपाथ (किमी) जब्त वस्तुएं टो किए गए वाहन
2024 5030.95 60,898 1,088
2025 2000.20 27,609 488
2026 (जनवरी-मई) 828.80 14,424 257

शहर के आजादपुर, चांदनी चौक, पटेल नगर, साकेत और द्वारका जैसे इलाकों में स्थिति काफी खराब है। चांदनी चौक में 12 जून 2026 को MCD नेता सदन जयभगवान यादव ने अवैध पार्किंग और कब्जे हटाने के सख्त निर्देश दिए हैं। वहीं, मई 2026 में दिल्ली सरकार के PWD ने 1400 किलोमीटर से ज्यादा सड़कों का DGPS सर्वे कराने का फैसला किया है ताकि सटीक पहचान कर अतिक्रमण हटाया जा सके और जाम की समस्या कम हो।

IIT दिल्ली के प्रोफेसर गीतम तिवारी ने बताया कि अक्सर संपन्न इलाकों में पैदल चलने वालों के नियमों को नजरअंदाज किया जाता है। जब गाड़ियां फुटपाथ घेर लेती हैं, तो लोग सड़क पर आने को मजबूर होते हैं और दुर्घटनाओं का शिकार होते हैं। पिछले चार सालों में दिल्ली में सड़क हादसों में 2524 पैदल यात्रियों की मौत हो चुकी है। 2023 की एक ऑडिट रिपोर्ट में यह भी सामने आया था कि दिल्ली के 84% फुटपाथ मानकों के हिसाब से चौड़े नहीं हैं और 50% से ज्यादा पर अवैध कब्जा है।