Delhi में इंटर्नशिप सीटों और स्टाइपेंड को लेकर विवाद, स्वास्थ्य मंत्री से मिले 50 से ज्यादा विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट्स
Delhi: दिल्ली में विदेश से डॉक्टरी की पढ़ाई कर लौटे छात्रों (FMGs) की मुश्किलें बढ़ गई हैं। इंटर्नशिप की सीटें न मिलने और स्टाइपेंड में भेदभाव को लेकर बुधवार को 50 से ज्यादा विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट्स ने दिल्ली के स्वास्थ्
Delhi: दिल्ली में विदेश से डॉक्टरी की पढ़ाई कर लौटे छात्रों (FMGs) की मुश्किलें बढ़ गई हैं। इंटर्नशिप की सीटें न मिलने और स्टाइपेंड में भेदभाव को लेकर बुधवार को 50 से ज्यादा विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट्स ने दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह से मुलाकात की। इन छात्रों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी इंटर्नशिप शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं, जिससे उनके करियर और मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है।
यह मुलाकात Federation of All India Medical Associations (FAIMA) के नेतृत्व में हुई। छात्रों ने बताया कि दिसंबर 2025 के सेशन में FMGE पास करने वाले लगभग 250 से 346 छात्र पिछले पांच महीनों से इंटर्नशिप सीट के लिए भटक रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्री ने इस मामले में जल्द समाधान का भरोसा दिया है। उन्होंने बताया कि स्टाइपेंड से जुड़ा प्रस्ताव अभी फाइनेंस डिपार्टमेंट के पास है और मुख्यमंत्री की मंजूरी मिलते ही इसे लागू कर दिया जाएगा।
इस विवाद में सुप्रीम कोर्ट का फैसला भी अहम है। 10 फरवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट्स को भी भारतीय मेडिकल ग्रेजुएट्स की तरह ही स्टाइपेंड मिलना चाहिए, जो करीब 26,300 रुपये महीना है। कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया था कि बकाया राशि का भुगतान तीन हफ्ते के भीतर किया जाए। नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने भी साफ किया है कि डोमिसाइल के आधार पर इंटर्नशिप से इनकार नहीं किया जा सकता और देशभर के 673 अस्पताल इसके लिए मंजूर हैं।
इतना सब होने के बाद भी कई अस्पताल वित्तीय बोझ के डर से इन छात्रों को सीट देने या पूरा स्टाइपेंड देने में आनाकानी कर रहे हैं। FAIMA ने इस समस्या को लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा को भी पत्र लिखा है। संगठन ने मांग की है कि FMG इंटर्नशिप सीटों की सीमा को 7.5% से बढ़ाकर 20-30% किया जाए ताकि भविष्य में छात्रों को ऐसी दिक्कतों का सामना न करना पड़े।