Delhi के फ्लाईओवरों के नीचे असुरक्षित बचपन, मासूमों को बचाने के लिए चादरों का सहारा ले रही हैं माताएं

Delhi: राजधानी दिल्ली के फ्लाईओवरों के नीचे रहने वाले गरीब परिवारों के लिए रातें किसी डर से कम नहीं हैं। यहां रहने वाली माताएं अपने बच्चों को बचाने के लिए खुद ढाल बन जाती हैं और चादरों का इस्तेमाल छिपने के लिए करती हैं त

Delhi: राजधानी दिल्ली के फ्लाईओवरों के नीचे रहने वाले गरीब परिवारों के लिए रातें किसी डर से कम नहीं हैं। यहां रहने वाली माताएं अपने बच्चों को बचाने के लिए खुद ढाल बन जाती हैं और चादरों का इस्तेमाल छिपने के लिए करती हैं ताकि उनके बच्चे सुरक्षित सो सकें। सड़क किनारे रहने वाले इन परिवारों की मजबूरी और डर अब एक गंभीर मुद्दा बन गया है।

हाल ही में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई जहां दिल्ली मेट्रो स्टेशन के पास फुटपाथ पर सो रही 10 साल की बच्ची का अपहरण कर उसके साथ बलात्कार किया गया और फिर उसकी हत्या कर दी गई। पुलिस ने इस मामले में एक कैब ड्राइवर को गिरफ्तार किया है, जिसकी मदद से बच्ची का शव अरावली के जंगलों से बरामद हुआ। इस घटना ने सड़क पर रहने वाले बच्चों की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली के Lieutenant Governor तरणजीत सिंह संधू ने दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने पुलिस को सख्त निर्देश दिए कि अपराध पर नियंत्रण रखा जाए और महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

दूसरी तरफ, दिल्ली सरकार ने झुग्गी-झोपड़ी निवासियों के लिए अपनी पुनर्वास नीति (Slum Rehabilitation Policy) में बदलाव किया है। अब 1 जनवरी 2025 तक की कट-ऑफ डेट मंजूर की गई है, जिससे करीब 20 लाख निवासियों को फायदा मिल सकता है और लगभग 4-5 लाख परिवारों को पक्का घर मिल पाएगा।

बाल अधिकार कार्यकर्ताओं और NGOs ने इस स्थिति पर अपनी चिंता जताई है। PARI की संस्थापक योगिता भायना और चेतना NGO के डायरेक्टर संजय गुप्ता ने बताया कि बेघर बच्चों, खासकर लड़कियों के लिए यौन शोषण और तस्करी का खतरा बहुत ज्यादा रहता है। माता-पिता काम पर जाते हैं, जिससे बच्चे अकेले रह जाते हैं। पूर्व सदस्य रीता सिंह ने कहा कि इन बच्चों को ‘गुड टच और बैड टच’ की जानकारी नहीं होती और मौजूदा नाइट शेल्टर भी पर्याप्त नहीं हैं।

इसके अलावा, PWD की ‘Adopt a Flyover’ पॉलिसी के तहत IOCL और DIAL जैसी कंपनियां फ्लाईओवरों के सौंदर्यीकरण का काम कर रही हैं, जिसमें अतिक्रमण हटाने और बेघर लोगों को वहां से हटाने पर जोर दिया जा रहा है। साथ ही, शहर के 44 पुराने फ्लाईओवरों का स्ट्रक्चरल ऑडिट शुरू किया गया है ताकि उनकी मरम्मत की जा सके।