Delhi में फ्लेक्स-फ्यूल कारों का क्रेज कम, अब तक सिर्फ 4 गाड़ियां हुईं रजिस्टर; जानिए क्या हैं वजह
Delhi: राजधानी दिल्ली में फ्लेक्स-फ्यूल कारों को लेकर लोगों में उतनी दिलचस्पी नहीं दिख रही है जितनी उम्मीद की गई थी। सरकारी वाहन पोर्टल के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में इस तकनीक की शुरुआत के बाद से दिल्ली में अब तक केवल च
Delhi: राजधानी दिल्ली में फ्लेक्स-फ्यूल कारों को लेकर लोगों में उतनी दिलचस्पी नहीं दिख रही है जितनी उम्मीद की गई थी। सरकारी वाहन पोर्टल के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में इस तकनीक की शुरुआत के बाद से दिल्ली में अब तक केवल चार यात्री वाहनों का पंजीकरण हुआ है। इनमें से तीन कारें जून 2026 में और एक कार जुलाई 2026 में रजिस्टर हुई हैं। इसी दौरान बाजार में एक फ्लेक्स-फ्यूल मोटरसाइकिल भी आई है।
इस धीमी रफ्तार के पीछे कई बड़े कारण हैं। सबसे बड़ी समस्या E85 ईंधन की कमी है, जो फिलहाल दिल्ली में बहुत कम पेट्रोल पंपों पर उपलब्ध है। इसके अलावा, ग्राहकों के पास चुनने के लिए बहुत कम मॉडल मौजूद हैं। उदाहरण के लिए, मारुति सुजुकी वैगन आर फ्लेक्स फ्यूल की कीमत सामान्य वैगन आर से करीब 84,000 रुपये ज्यादा है, जो आम खरीदारों के लिए एक बड़ी बाधा है। साथ ही, दिल्ली में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को मिलने वाले फायदों की वजह से लोग ईको-फ्रेंडली विकल्प के तौर पर ईवी को ज्यादा पसंद कर रहे हैं।
सरकार इस तकनीक को बढ़ावा देने के लिए तेजी से काम कर रही है। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने पूसा रोड पर इंडियन ऑयल का पहला E85 स्टेशन शुरू किया है। सरकार का प्लान दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, पुणे और नागपुर में 50 से 100 स्टेशन बनाने का है, जिसे 2027 के अंत तक देशभर में 5,000 स्टेशनों तक ले जाने का लक्ष्य है। हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि E85 ईंधन, E20 पेट्रोल के मुकाबले लगभग 20 रुपये प्रति लीटर सस्ता होगा।
वहीं, केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने E20 पेट्रोल से इंजन को नुकसान पहुंचने वाले सोशल मीडिया दावों को गलत बताया है। उन्होंने माना कि इससे माइलेज पर थोड़ा असर पड़ता है, लेकिन इंजन खराब नहीं होता। गडकरी ने वाहन कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे सर्विसिंग के दौरान उन हिस्सों को मुफ्त में बदलें जो E20 ईंधन से प्रभावित हो सकते हैं। सरकार ने E100 (100% एथेनॉल) ईंधन के इस्तेमाल को मंजूरी देने वाले नियमों पर भी हस्ताक्षर कर दिए हैं ताकि कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम की जा सके।