Delhi में पहली बारिश के बाद जलभराव, सरकार के दावों और विपक्ष के आरोपों के बीच फंसी जनता

Delhi: राजधानी में मानसून की पहली भारी बारिश ने एक बार फिर शहर की रफ्तार रोक दी। सड़कों पर पानी भरने से आम लोगों को काफी परेशानी हुई, जबकि सरकार और विपक्ष के बीच इस मुद्दे पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। मुख्यम

Delhi: राजधानी में मानसून की पहली भारी बारिश ने एक बार फिर शहर की रफ्तार रोक दी। सड़कों पर पानी भरने से आम लोगों को काफी परेशानी हुई, जबकि सरकार और विपक्ष के बीच इस मुद्दे पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और पीडब्ल्यूडी मंत्री परवेश साहिब सिंह ने खुद व्यवस्थाओं का जायजा लिया है।

दिल्ली सरकार ने इस बार मानसून से पहले काफी तैयारी का दावा किया था। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 17 जून 2026 को ‘बाढ़ नियंत्रण आदेश 2026’ जारी किया था, जिसमें लापरवाही करने वाले नोडल अधिकारियों की जवाबदेही तय की गई थी। पीडब्ल्यूडी ने शहर के 45 संवेदनशील इलाकों की पहचान कर वहां 179 सीसीटीवी कैमरों से निगरानी रखी थी। साथ ही, जल निकासी के लिए 754 स्थायी और 305 अस्थायी पंप तैनात किए गए थे।

नगर निगम (MCD) की रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल 793 नालों से करीब 1,80,595 मीट्रिक टन गाद निकाली गई, जो लक्ष्य से भी ज्यादा थी। सरकार का कहना है कि मिंटो ब्रिज, धौला कुआं और मूलचंद जैसे हॉटस्पॉट इस बार बेहतर स्थिति में रहे और जलभराव नियंत्रण में था।

दूसरी तरफ, विपक्ष के नेता अंकुश नारंग ने इन दावों को खारिज कर दिया है। उन्होंने 8 जुलाई को भाजपा सरकार पर नालों की सफाई में नाकाम रहने का आरोप लगाया। वहीं, मौसम विभाग (IMD) ने 10 जुलाई को दिल्ली के लिए ‘येलो अलर्ट’ जारी किया था, जिसमें हल्की से मध्यम बारिश और गरज-चमक की संभावना जताई गई थी। शहर में यातायात और जलभराव पर नजर रखने के लिए एक 24×7 कंट्रोल रूम भी बनाया गया है।