Delhi: दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल ने चिकित्सा के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। फरीदाबाद की रहने वाली 65 वर्षीय झर्णा भौमिक ने अपने दोनों फेफड़ों के ट्रांसप्लांट के बाद सफलतापूर्वक एक साल पूरा कर लिया
Delhi: दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल ने चिकित्सा के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। फरीदाबाद की रहने वाली 65 वर्षीय झर्णा भौमिक ने अपने दोनों फेफड़ों के ट्रांसप्लांट के बाद सफलतापूर्वक एक साल पूरा कर लिया है। वह दिल्ली के किसी भी प्राइवेट अस्पताल की पहली ऐसी मरीज बनी हैं जिन्होंने इस सर्जरी के बाद एक साल का समय पूरा किया है।
झर्णा भौमिक की बीमारी और सर्जरी की पूरी कहानी क्या है
झर्णा भौमिक साल 2010 से स्क्लेरोडर्मा के कारण इंटरस्टिशियल लंग डिजीज (ILD) से जूझ रही थीं। साल 2025 तक उनकी हालत इतनी खराब हो गई कि उन्हें हर समय ऑक्सीजन सपोर्ट की जरूरत पड़ने लगी। 15 मई 2025 को इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल में उनका बाइलैटरल लंग ट्रांसप्लांट किया गया। यह सर्जरी नोएडा के एक 48 वर्षीय व्यक्ति के अंगों के दान से संभव हो पाई, जिन्हें 14 मई को ब्रेन-डेड घोषित किया गया था।
दिल्ली-NCR के मरीजों के लिए यह खबर क्यों जरूरी है
डॉ. मुकेश गोयल के मुताबिक, अब NOTTO ने अपोलो दिल्ली को फेफड़ों के आवंटन के लिए मान्यता दे दी है। इसका सीधा फायदा दिल्ली और NCR के मरीजों को होगा क्योंकि अब उन्हें इस तरह की जटिल सर्जरी के लिए चेन्नई या हैदराबाद जैसे दूर के शहरों में नहीं जाना पड़ेगा। हालांकि, डॉ. अवधेश बंसल ने बताया कि भारत में अंगों की भारी कमी है। देश में लगभग 1,000 लोग फेफड़ों के ट्रांसप्लांट का इंतजार करते हैं, लेकिन अंगों की कमी के कारण साल में केवल 150 सर्जरी ही हो पाती हैं।
अंग दान की जरूरत पर विशेषज्ञों की राय
डॉक्टरों का कहना है कि समाज में अंग दान को लेकर जागरूकता बढ़ाना बहुत जरूरी है। झर्णा भौमिक ने अपनी नई जिंदगी के लिए मेडिकल टीम और अंग देने वाले परिवार का आभार जताया है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे अंग दान के महत्व को समझें ताकि अन्य जरूरतमंद लोगों की जान बचाई जा सके। सर्जरी के बाद सही रिहैबिलिटेशन यानी रिकवरी प्रोसेस भी मरीज के स्वस्थ होने में बड़ी भूमिका निभाता है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
झर्णा भौमिक को कौन सी बीमारी थी और उनका इलाज कहाँ हुआ
झर्णा भौमिक स्क्लेरोडर्मा के कारण होने वाली इंटरस्टिशियल लंग डिजीज (ILD) से पीड़ित थीं। उनका बाइलैटरल लंग ट्रांसप्लांट दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल में किया गया।
भारत में लंग ट्रांसप्लांट के लिए अंगों की क्या स्थिति है
भारत में अंगों की भारी कमी है। विशेषज्ञों के अनुसार, जहाँ लगभग 1,000 मरीज फेफड़ों के ट्रांसप्लांट का इंतजार कर रहे हैं, वहीं अंगों की अनुपलब्धता के कारण साल भर में केवल 150 सर्जरी हो पाती हैं।