Delhi: दिल्ली की आबकारी नीति (Excise Policy) मामले में एक बड़ा अपडेट आया है। दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस मनोज जैन 19 मई, 2026 को CBI की उस याचिका पर सुनवाई करेंगे, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और अन्य आरोपियों
Delhi: दिल्ली की आबकारी नीति (Excise Policy) मामले में एक बड़ा अपडेट आया है। दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस मनोज जैन 19 मई, 2026 को CBI की उस याचिका पर सुनवाई करेंगे, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और अन्य आरोपियों को ट्रायल कोर्ट द्वारा दिए गए डिस्चार्ज (बरी किए जाने) के आदेश को चुनौती दी गई है। यह मामला अब एक नई बेंच के पास पहुंचा है।
केस की सुनवाई जस्टिस मनोज जैन के पास क्यों पहुंची?
पहले इस मामले की सुनवाई जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा कर रही थीं। लेकिन, उन्होंने अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी (AAP) के कई नेताओं के खिलाफ आपराधिक अवमानना (Criminal Contempt) की कार्यवाही शुरू की। जस्टिस शर्मा ने कहा कि जब जज के खिलाफ व्यक्तिगत आरोप लगाए जाते हैं और सोशल मीडिया पर कैंपेन चलाया जाता है, तो न्यायिक मर्यादा के कारण मुख्य मामले को दूसरी बेंच को सौंपना जरूरी है। इसी वजह से उन्होंने यह मामला चीफ जस्टिस को रीअसाइनमेंट के लिए भेज दिया था।
19 मई को कोर्ट में क्या-क्या होगा?
19 मई को दिल्ली हाई कोर्ट में दो अलग-अलग तरह की सुनवाई होगी। पहली सुनवाई जस्टिस मनोज जैन करेंगे, जिसमें CBI की उस याचिका पर गौर किया जाएगा जिसमें ट्रायल कोर्ट द्वारा केजरीवाल और अन्य 23 आरोपियों को डिस्चार्ज करने के फैसले को चुनौती दी गई है। वहीं, दूसरी तरफ जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर Dudeja की डिवीजन बेंच आपराधिक अवमानना (Contempt Case) की कार्यवाही पर सुनवाई करेगी।
अब तक इस मामले में क्या हुआ?
ट्रायल कोर्ट ने पहले सभी 23 आरोपियों, जिनमें अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और के कविता शामिल थे, उन्हें डिस्चार्ज कर दिया था। कोर्ट ने CBI की जांच में कमियां बताई थीं। हालांकि, जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने शुरुआती तौर पर माना था कि डिस्चार्ज का यह आदेश गलत था। इस बीच, AAP नेताओं द्वारा सोशल मीडिया पर एडिटेड वीडियो और पत्रों के जरिए न्यायपालिका को निशाना बनाने के आरोपों के बाद अवमानना की कार्यवाही शुरू हुई।
Frequently Asked Questions (FAQs)
CBI ने हाई कोर्ट में क्या याचिका दायर की है?
CBI ने ट्रायल कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और अन्य 22 आरोपियों को आबकारी नीति मामले में डिस्चार्ज (बरी) कर दिया गया था।
अरविंद केजरीवाल और AAP नेताओं पर अवमानना का मामला क्यों चला?
उन पर आरोप है कि उन्होंने सोशल मीडिया कैंपेन, सार्वजनिक बयानों और एडिटेड वीडियो के जरिए जज और न्यायपालिका को निशाना बनाया, जिससे कोर्ट की छवि खराब करने की कोशिश की गई।