Delhi में पुरानी कार स्क्रैप करने पर मिलेगा 1 लाख रुपये का इंसेंटिव, नई EV पॉलिसी 2026-2030 लागू
Delhi: दिल्ली सरकार ने शहर की हवा को साफ करने और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए नई EV पॉलिसी 2026-2030 लागू कर दी है। यह नीति 1 जुलाई 2026 से शुरू हो चुकी है और 31 मार्च 2030 तक चलेगी। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने
Delhi: दिल्ली सरकार ने शहर की हवा को साफ करने और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए नई EV पॉलिसी 2026-2030 लागू कर दी है। यह नीति 1 जुलाई 2026 से शुरू हो चुकी है और 31 मार्च 2030 तक चलेगी। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कैबिनेट की मंजूरी के बाद इसे अधिसूचित किया है, जिसका मुख्य लक्ष्य 2030 तक दिल्ली के कुल वाहनों में से कम से कम 30% को इलेक्ट्रिक बनाना है।
इस नीति के तहत उन लोगों को बड़ा फायदा मिलेगा जिनके पास BS-IV या उससे पुरानी पेट्रोल और डीजल कारें हैं। अगर आप अपनी पुरानी गाड़ी को स्क्रैप करके नई इलेक्ट्रिक कार खरीदते हैं, तो सरकार आपको भारी प्रोत्साहन राशि देगी। इसके अलावा, ₹30 लाख से कम कीमत वाली इलेक्ट्रिक कारों पर रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस भी पूरी तरह माफ होगी।
पुरानी गाड़ियों को स्क्रैप करने पर मिलने वाली प्रोत्साहन राशि की जानकारी नीचे दी गई है:
| वाहन का प्रकार | इंसेंटिव राशि | शर्त |
|---|---|---|
| चार-पहिया (कार) | ₹1,00,000 | EV की कीमत ₹30 लाख से कम हो (पहले 1 लाख आवेदकों के लिए) |
| दो-पहिया वाहन | ₹10,000 | – |
| तीन-पहिया वाहन | ₹25,000 | – |
| N1 कमर्शियल ट्रक | ₹50,000 | – |
| ग्रामीण सेवा इकाइयां | ₹15,000 | – |
इस लाभ को पाने के लिए आपको अपनी पुरानी गाड़ी को सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त स्क्रैपिंग एजेंसी में देना होगा, जहाँ से आपको एक जमा प्रमाणपत्र (CoD) मिलेगा। इस सर्टिफिकेट के मिलने के छह महीने के अंदर आपको नई इलेक्ट्रिक गाड़ी खरीदनी होगी। इसके बाद परिवहन विभाग में आवेदन करना होगा और सब्सिडी की राशि सीधे बैंक खाते में DBT के जरिए भेजी जाएगी। ध्यान रहे कि सब्सिडी लेने के बाद वाहन को तीन साल तक दिल्ली के बाहर ट्रांसफर या रजिस्टर नहीं किया जा सकेगा।
सरकार ने पंजीकरण के नियमों में भी बड़े बदलाव किए हैं। 1 जनवरी 2027 से केवल इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर और N1 ट्रकों का रजिस्ट्रेशन होगा, जबकि 1 अप्रैल 2028 से सिर्फ इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर ही रजिस्टर किए जाएंगे। स्कूल बसों के लिए भी नियम तय किए गए हैं, जिसके तहत उन्हें दो साल के भीतर अपने बेड़े का 10% हिस्सा इलेक्ट्रिक करना होगा। साथ ही, अब हर कार डीलरशिप पर कम से कम एक चार्जिंग स्टेशन होना अनिवार्य होगा।
परिवहन मंत्री सिंह ने हाल ही में एक समीक्षा बैठक की है ताकि इस पूरी प्रक्रिया को एक ऑनलाइन पोर्टल के जरिए पारदर्शी बनाया जा सके। वहीं, मॉर्गन स्टेनली की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह नीति वाहन निर्माताओं के लिए चुनौती बन सकती है, हालांकि फिलहाल इसका वित्तीय असर मामूली रहने की उम्मीद है।