Delhi में अब हर EV डीलरशिप पर चार्जिंग स्टेशन लगाना होगा जरूरी, नियम तोड़ा तो होगी कड़ी कार्रवाई
Delhi: दिल्ली सरकार ने राजधानी में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के नेटवर्क को बढ़ाने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। नई इलेक्ट्रिक वाहन नीति 2026 के तहत अब शहर की हर अधिकृत ईवी डीलरशिप के लिए सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन लगाना अनिव
Delhi: दिल्ली सरकार ने राजधानी में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के नेटवर्क को बढ़ाने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। नई इलेक्ट्रिक वाहन नीति 2026 के तहत अब शहर की हर अधिकृत ईवी डीलरशिप के लिए सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। सरकार का मकसद है कि लोगों को गाड़ी चार्ज करने के लिए भटकना न पड़े और ईवी अपनाने की रफ्तार बढ़े।
परिवहन विभाग ने सभी डीलरों को यह सुविधा शुरू करने के लिए छह महीने का समय दिया है। अगर कोई डीलर इस समय सीमा के भीतर चार्जिंग स्टेशन नहीं लगाता है, तो उसके खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाएगा। लापरवाही बरतने वाले डीलरों को विभाग के पोर्टल से डी-एक्टिवेट कर दिया जाएगा, जिससे उनकी सब्सिडी से जुड़ी सारी प्रक्रियाएं रुक जाएंगी।
इस नई व्यवस्था में वाहनों की श्रेणी के हिसाब से चार्जिंग पॉइंट्स की संख्या तय की गई है। दोपहिया और तिपहिया वाहनों की डीलरशिप पर कम से कम तीन सार्वजनिक चार्जिंग पॉइंट लगाने होंगे, जबकि चारपहिया वाहनों की डीलरशिप पर कम से कम दो पॉइंट लगाना जरूरी होगा। खास बात यह है कि ये स्टेशन किसी एक कंपनी के लिए नहीं होंगे, बल्कि किसी भी ब्रांड की इलेक्ट्रिक गाड़ी चलाने वाला व्यक्ति यहाँ से चार्जिंग करा सकेगा।
| नियम/सुविधा | विवरण |
|---|---|
| नीति की अवधि | 1 जुलाई 2026 से 31 मार्च 2030 तक |
| चार्जिंग स्टेशन लक्ष्य | 9,000 से बढ़ाकर 32,000 करना |
| दोपहिया/तिपहिया डीलरशिप | कम से कम 3 चार्जिंग पॉइंट अनिवार्य |
| चारपहिया डीलरशिप | कम से कम 2 चार्जिंग पॉइंट अनिवार्य |
| दोपहिया सब्सिडी | 30,000 रुपये तक |
| तिपहिया सब्सिडी | 50,000 रुपये तक |
| N1 कमर्शियल वाहन सब्सिडी | 1 लाख रुपये तक |
| रोड टैक्स छूट | 30 लाख तक की कार पर 100% छूट |
भविष्य की योजनाओं के मुताबिक, 1 जनवरी 2027 से दिल्ली में केवल इलेक्ट्रिक ऑटो और N1 श्रेणी के मालवाहक वाहनों का ही रजिस्ट्रेशन होगा। वहीं 1 अप्रैल 2028 से सभी नए दोपहिया वाहन सिर्फ इलेक्ट्रिक ही रजिस्टर्ड किए जाएंगे। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सौर ऊर्जा आधारित और फास्ट चार्जिंग स्टेशनों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं ताकि वायु प्रदूषण कम हो सके और लोग आसानी से ईवी का इस्तेमाल कर सकें।
इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी परिवहन विभाग और दिल्ली ट्रांसको लिमिटेड (DTL) करेंगे। बैटरी कचरे के सही प्रबंधन की जिम्मेदारी दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) को सौंपी गई है। हालांकि, कुछ इलाकों में फुटपाथों पर चार्जिंग स्टेशन बनने से पैदल चलने वालों को होने वाली परेशानी और ट्रैफिक जाम की शिकायतें भी सामने आई हैं।