Delhi में 2028 से नहीं मिलेंगी पेट्रोल-डीजल की नई टू-व्हीलर, सिर्फ इलेक्ट्रिक गाड़ियां होंगी रजिस्टर

Delhi: दिल्ली सरकार ने प्रदूषण कम करने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। अब राजधानी में 1 अप्रैल 2028 से कोई भी नई पेट्रोल या डीजल टू-व्हीलर रजिस्टर नहीं होगी। दिल्ली कैबिनेट ने सोमवार, 29 जून 2026 को EV Policy 2.0 को मंजूरी

Delhi: दिल्ली सरकार ने प्रदूषण कम करने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। अब राजधानी में 1 अप्रैल 2028 से कोई भी नई पेट्रोल या डीजल टू-व्हीलर रजिस्टर नहीं होगी। दिल्ली कैबिनेट ने सोमवार, 29 जून 2026 को EV Policy 2.0 को मंजूरी दे दी है, जिसके तहत केवल इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स को ही रजिस्ट्रेशन की अनुमति मिलेगी।

यह नई पॉलिसी 1 जुलाई 2026 से लागू होगी और 31 मार्च 2030 तक चलेगी। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इसे शहर के ट्रांसपोर्ट सिस्टम को सुधारने और हवा को साफ करने वाला क्रांतिकारी कदम बताया है। ट्रांसपोर्ट कमिश्नर निहारिका राय ने साफ किया कि यह नियम खास तौर पर टू-व्हीलर, थ्री-व्हीलर और कमर्शियल सामान ढोने वाली गाड़ियों के लिए है क्योंकि ये प्रदूषण में बड़ा हिस्सा बढ़ाते हैं।

आम लोगों के लिए राहत की बात यह है कि जो लोग पहले से पेट्रोल या डीजल गाड़ियां चला रहे हैं, उन पर कोई बैन नहीं लगेगा। वे अपनी गाड़ियां पुराने नियमों के हिसाब से चला सकेंगे। इसके अलावा, 1 जनवरी 2027 से नए इलेक्ट्रिक ऑटो-रिक्शा और N1 कैटेगरी के गुड्स कैरियर का नियम भी लागू हो जाएगा।

सरकार ने इलेक्ट्रिक गाड़ियों को बढ़ावा देने के लिए 15,000 करोड़ रुपये का बजट रखा है। इसमें से 7,000 करोड़ रुपये सब्सिडी के लिए और 8,000 करोड़ रुपये चार्जिंग स्टेशन और टैक्स में छूट के लिए दिए जाएंगे।

सुविधा/नियम विवरण
टू-व्हीलर सब्सिडी (पहला साल) 30,000 रुपये
टू-व्हीलर सब्सिडी (दूसरा साल) 20,000 रुपये
टू-व्हीलर सब्सिडी (तीसरा साल) 10,000 रुपये
रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन 100% छूट (30 लाख तक की कार पर)
स्क्रैपेज इंसेंटिव 5,000 से 1 लाख रुपये तक
चार्जिंग पॉइंट्स 30,000 से ज्यादा नए स्टेशन
स्कूल बस नियम 2030 तक 30% बसें इलेक्ट्रिक करनी होंगी

पॉलिसी में एक जरूरी शर्त यह भी है कि अगर कोई व्यक्ति सरकारी सब्सिडी लेकर गाड़ी खरीदता है, तो वह तीन साल तक उस गाड़ी को किसी दूसरे राज्य में नहीं बेच सकेगा और न ही वहां रजिस्टर करा सकेगा। इस पॉलिसी का स्वागत Ather Energy और Ultraviolette Automotive जैसी कंपनियों ने किया है। हालांकि, SIAM जैसी संस्थाओं ने बैटरी सप्लाई और पर्यावरण पर इसके असर को लेकर कुछ चिंताएं जताई थीं।