Delhi में अब सिर्फ इलेक्ट्रिक ऑटो मिलेंगे, सरकार ने लागू की EV पॉलिसी 2.0, पुराने ऑटो बदलने पर मिलेगी सब्सिडी

Delhi: दिल्ली सरकार ने शहर की हवा को साफ करने के लिए इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) पॉलिसी 2.0 लागू कर दी है। यह पॉलिसी 1 जुलाई 2026 से शुरू हो चुकी है और मार्च 2030 तक चलेगी। इस नए नियम के बाद अब दिल्ली में आने वाले समय में पेट

Delhi: दिल्ली सरकार ने शहर की हवा को साफ करने के लिए इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) पॉलिसी 2.0 लागू कर दी है। यह पॉलिसी 1 जुलाई 2026 से शुरू हो चुकी है और मार्च 2030 तक चलेगी। इस नए नियम के बाद अब दिल्ली में आने वाले समय में पेट्रोल और सीएनजी की जगह सिर्फ बैटरी से चलने वाले वाहन ही दिखेंगे।

पॉलिसी के मुताबिक 1 जनवरी 2027 से दिल्ली में नए रजिस्ट्रेशन के लिए सिर्फ इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर (L5 कैटेगरी) को ही अनुमति दी जाएगी। सरकार का लक्ष्य है कि 2027 तक नए रजिस्टर होने वाले 95% वाहन बैटरी से चलने वाले हों। इसके अलावा 1 अप्रैल 2028 से नए पेट्रोल और सीएनजी टू-व्हीलर्स का रजिस्ट्रेशन पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा और केवल इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स ही रजिस्टर होंगे। इस पूरे सिस्टम को मजबूत करने के लिए सरकार अगले चार साल में 15,000 करोड़ रुपये खर्च करेगी, जिससे चार्जिंग स्टेशन और अन्य सुविधाएं बढ़ाई जा सकेंगी।

ऑटो चालकों के लिए सरकार ने कुछ आर्थिक मदद का भी ऐलान किया है। पुराने सीएनजी ऑटो को बदलने या नया इलेक्ट्रिक ऑटो खरीदने पर पहले साल 50,000 रुपये की डिमांड इंसेंटिव मिलेगी। इसके साथ ही BS-IV या उससे पुराने मॉडल वाले थ्री-व्हीलर्स को स्क्रैप करने पर 25,000 रुपये अलग से मिलेंगे। ग्रामीण सेवा वाहनों के लिए 15,000 रुपये और पुराने ई-रिक्शा के लिए 5,000 रुपये की स्क्रैपेज राशि पर विचार किया जा रहा है।

सुविधा/नियम विवरण
नया रजिस्ट्रेशन (थ्री-व्हीलर) 1 जनवरी 2027 से सिर्फ इलेक्ट्रिक
नया रजिस्ट्रेशन (टू-व्हीलर) 1 अप्रैल 2028 से सिर्फ इलेक्ट्रिक
खरीद सब्सिडी (पहले साल) 50,000 रुपये
स्क्रैपेज इंसेंटिव (L5M) 25,000 रुपये
कुल सरकारी निवेश 15,000 करोड़ रुपये
चार्जिंग स्टेशन नियम हर डीलर के पास कम से कम एक पब्लिक स्टेशन होगा

हालांकि, इस बदलाव को लेकर ऑटो चालकों में चिंता भी है। दिल्ली ऑटो रिक्शा संघ के महासचिव राजिंदर सोनी ने कहा कि इलेक्ट्रिक ऑटो और सीएनजी ऑटो की कीमत में करीब 80,000 रुपये का अंतर है, जो चालकों पर आर्थिक बोझ डालेगा। चालकों का कहना है कि चार्जिंग स्टेशनों की कमी, बैटरी बदलने की समस्या और लंबी चार्जिंग समय की वजह से उनकी कमाई घट सकती है। IEEFA की एक स्टडी में यह भी सामने आया कि दिल्ली के 84% पब्लिक चार्जर खराब पड़े हैं, जिससे बुनियादी ढांचे पर सवाल उठ रहे हैं।

दूसरी तरफ IIT दिल्ली और इंटरनेशनल काउंसिल ऑन क्लीन ट्रांसपोर्टेशन के विशेषज्ञों ने इस कदम को प्रदूषण कम करने के लिए एक बड़ा बदलाव बताया है। सरकार ने साफ किया है कि यह पॉलिसी सिर्फ प्योर इलेक्ट्रिक वाहनों पर केंद्रित है और इसमें हाइब्रिड वाहनों के लिए कोई टैक्स छूट या सब्सिडी नहीं दी गई है।