Delhi: दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने जीएसटी और वैट के नाम पर करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी करने वाले दो अलग-अलग गिरोहों का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने अब तक एक चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) समेत कुल आठ लोगों को गिरफ्ता
Delhi: दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने जीएसटी और वैट के नाम पर करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी करने वाले दो अलग-अलग गिरोहों का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने अब तक एक चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) समेत कुल आठ लोगों को गिरफ्तार किया है। इन लोगों ने फर्जी कंपनियां बनाकर और दूसरों के दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल कर सरकारी खजाने को चूना लगाया।
28.4 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी में CA गिरफ्तार
पहले मामले में EOW ने 12 मई को राजीव कुमार पाराशर और चांदनी चौक के एक CA अतुल गुप्ता को गिरफ्तार किया। आरोपियों ने ‘मेसर्स स्वस्तिक एंटरप्राइजेज’ के कागजात और जीएसटी क्रेडेंशियल्स का गलत इस्तेमाल किया। इस तरह करीब 28.4 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन किए गए। पैसे की हेराफेरी के लिए फर्जी कंपनियां बनाई गईं और बैंक खातों के जरिए रकम को तेजी से घुमाया गया ताकि सबूत मिटाए जा सकें।
128 करोड़ का फर्जी इनवॉइसिंग रैकेट पकड़ा गया
दूसरे बड़े मामले में 15 मई को पुलिस ने छापेमारी कर राज कुमार दीक्षित, अमर कुमार, विभाष कुमार मित्रा, नितिन वर्मा, मोहम्मद वसीम और आबिद को पकड़ा। इस गिरोह ने एक व्यक्ति के आधार, पैन कार्ड और बिजली बिल का इस्तेमाल कर ‘मेसर्स आरके एंटरप्राइजेज’ नाम की फर्जी फर्म बनाई थी। इस फर्म के जरिए 128 करोड़ रुपये से ज्यादा का लेनदेन हुआ और करीब 10 करोड़ रुपये का फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) लिया गया।
पुलिस ने क्या-क्या बरामद किया
| बरामद सामान |
विवरण |
| नकद राशि |
51.12 लाख रुपये |
| इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस |
लैपटॉप और मोबाइल फोन |
| दस्तावेज |
जाली कागजात और रिकॉर्ड |
| कुल गिरफ्तार लोग |
8 व्यक्ति (दो अलग मामलों में) |
पुलिस ने बताया कि दूसरे मामले का मुख्य साजिशकर्ता दिलीप कुमार अभी भी फरार है, जिसकी तलाश की जा रही है। EOW अब मनी ट्रेल की जांच कर रही है ताकि यह पता चल सके कि इस पैसे का असली फायदा किसे मिला।
Frequently Asked Questions (FAQs)
जीएसटी धोखाधड़ी के दूसरे मामले में कितनी रकम का घोटाला हुआ
दूसरे मामले में करीब 128 करोड़ रुपये का लेनदेन किया गया और लगभग 10 करोड़ रुपये का फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) लिया गया।
इन धोखाधड़ी मामलों में आरोपियों ने कैसे काम किया
आरोपियों ने शिकायतकर्ताओं के आधार कार्ड, पैन कार्ड और बायोमेट्रिक विवरण का दुरुपयोग कर फर्जी कंपनियां बनाईं और बिना किसी वास्तविक माल या सेवा की आपूर्ति के फर्जी इनवॉइसिंग की।