Delhi: दिल्ली के लोगों के लिए गर्मी के साथ-साथ अब बिजली बिल की चिंता भी बढ़ सकती है। अपीलीय बिजली न्यायाधिकरण (APTEL) ने दिल्ली विद्युत नियामक आयोग (DERC) की उस अर्जी को खारिज कर दिया है, जिसमें बकाया भुगतान के लिए और सम
Delhi: दिल्ली के लोगों के लिए गर्मी के साथ-साथ अब बिजली बिल की चिंता भी बढ़ सकती है। अपीलीय बिजली न्यायाधिकरण (APTEL) ने दिल्ली विद्युत नियामक आयोग (DERC) की उस अर्जी को खारिज कर दिया है, जिसमें बकाया भुगतान के लिए और समय मांगा गया था। इस फैसले के बाद अब दिल्ली में बिजली की दरों में बढ़ोतरी होने की पूरी संभावना है।
बिजली बिल क्यों बढ़ सकते हैं और क्या है पूरा मामला?
दरअसल, दिल्ली की बिजली वितरण कंपनियों (Discoms) जैसे BRPL, BYPL और TPDDL का करीब 30,000 करोड़ से 38,500 करोड़ रुपये का बकाया है। यह बकाया पिछले 10 सालों में बिजली की दरों में बदलाव न होने की वजह से जमा हुआ है। DERC ने इस रकम को चुकाने के लिए और समय मांगा था ताकि उपभोक्ताओं पर एक साथ बोझ न पड़े, लेकिन APTEL ने इसे खारिज कर दिया है। अब इस बकाया राशि की वसूली बिजली बिलों में एक अतिरिक्त शुल्क (Surcharge) जोड़कर की जाएगी, जो अगले सात सालों तक चलेगा।
सरकार और कोर्ट के आदेश का क्या असर होगा?
सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त 2025 में निर्देश दिया था कि अप्रैल 2024 से लंबित बकाया का भुगतान शुरू किया जाए और इसे अप्रैल 2028 तक पूरा किया जाए। APTEL ने अब DERC को आदेश दिया है कि वह तीन हफ्ते के भीतर विनियामक परिसंपत्तियों को खत्म करने का निर्देश जारी करे। इसके अलावा, CAG ऑडिट के प्रस्ताव को खारिज करते हुए कोर्ट ने एक चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) फर्म से ऑडिट कराने को कहा है।
क्या आम जनता को मिलेगी राहत?
बिजली दरों में बढ़ोतरी की संभावना को देखते हुए दिल्ली सरकार ने संकेत दिए हैं कि वह उपभोक्ताओं को बचाने के लिए सब्सिडी देने की योजना बना रही है। बिजली मंत्री आशीष सूद के अनुसार, सरकार कोशिश कर रही है कि टैरिफ बढ़ने का सीधा असर आम निवासियों पर न पड़े। इसका मतलब यह है कि आधार टैरिफ तो बढ़ सकता है, लेकिन सरकार सब्सिडी के जरिए इसका एक हिस्सा खुद वहन करेगी ताकि बिलों में अचानक बहुत ज्यादा उछाल न आए।