Delhi की जिला अदालतों की वित्तीय अधिकारिता बढ़कर हुई 10 करोड़ रुपये, अब छोटे मामलों के लिए नहीं जाना होगा हाई कोर्ट
Delhi: राजधानी दिल्ली के लोगों के लिए न्याय पाना अब और आसान होगा। दिल्ली उच्च न्यायालय की फुल कोर्ट की सिफारिश के बाद जिला अदालतों की वित्तीय अधिकारिता को 2 करोड़ रुपये से बढ़ाकर अब 10 करोड़ रुपये कर दिया गया है। इस बदला
Delhi: राजधानी दिल्ली के लोगों के लिए न्याय पाना अब और आसान होगा। दिल्ली उच्च न्यायालय की फुल कोर्ट की सिफारिश के बाद जिला अदालतों की वित्तीय अधिकारिता को 2 करोड़ रुपये से बढ़ाकर अब 10 करोड़ रुपये कर दिया गया है। इस बदलाव से अब ज्यादा राशि वाले मामले भी जिला स्तर पर ही सुलझ सकेंगे।
इस फैसले का सबसे बड़ा असर यह होगा कि दिल्ली हाई कोर्ट पर मुकदमों का बोझ कम होगा और जिला अदालतों में मामलों का निपटारा तेजी से हो सकेगा। इससे आम जनता को अपनी कानूनी लड़ाई के लिए बार-बार हाई कोर्ट के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। दिल्ली की सभी जिला अदालत बार एसोसिएशनों की कोऑर्डिनेशन कमेटी ने इस निर्णय का स्वागत किया है। कमेटी के महासचिव विजय बिश्नोई ने इस सफलता का श्रेय वरिष्ठ सदस्यों और अधिवक्ताओं के सहयोग को दिया है।
जिला अदालतों की वित्तीय सीमा में समय-समय पर बदलाव होते रहे हैं, जिसका विवरण नीचे दिया गया है:
| वर्ष | वित्तीय अधिकारिता (सीमा) | विशेष विवरण |
|---|---|---|
| 2003 | 5 लाख से 20 लाख रुपये | सीमा में पहली बड़ी वृद्धि |
| 2015 | 20 लाख से 2 करोड़ रुपये | दिल्ली उच्च न्यायालय संशोधन अधिनियम, 2015 के तहत |
| 2026 | 2 करोड़ से 10 करोड़ रुपये | जुलाई 2026 में प्रभावी निर्णय |
हालांकि, बार कोऑर्डिनेशन कमेटी का कहना है कि उनका लक्ष्य अभी पूरा नहीं हुआ है। वे केंद्र सरकार के साथ मिलकर इस सीमा को 20 करोड़ रुपये या असीमित करने की कोशिश जारी रखेंगे। इससे पहले मई 2026 में दिल्ली उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन (DHCBA) ने सीमा बढ़ाने के प्रस्ताव पर कुछ चिंताएं जताई थीं, लेकिन वर्तमान में 10 करोड़ रुपये की वृद्धि लागू हो चुकी है।