Delhi की जिला अदालतों की आर्थिक पावर बढ़ाने पर विवाद, वकीलों ने शुरू की हड़ताल

Delhi: राजधानी दिल्ली की निचली अदालतों में सिविल जजों और जिला जजों की आर्थिक अधिकारिता यानी पैसों की सीमा बढ़ाने को लेकर कानूनी खींचतान चल रही है। इस मामले में हाई कोर्ट में नई अर्जी दाखिल की गई है, जबकि जिला अदालतों की

Delhi: राजधानी दिल्ली की निचली अदालतों में सिविल जजों और जिला जजों की आर्थिक अधिकारिता यानी पैसों की सीमा बढ़ाने को लेकर कानूनी खींचतान चल रही है। इस मामले में हाई कोर्ट में नई अर्जी दाखिल की गई है, जबकि जिला अदालतों की पावर बढ़ाने के प्रस्ताव के खिलाफ हाई कोर्ट के वकील सड़कों पर उतर आए हैं।

वकील अमित साहनी ने दिल्ली हाई कोर्ट में एक नई अर्जी दी है, जिसमें सिविल जजों की आर्थिक पावर को 3 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये तक करने की मांग की गई है। इस मामले में दिल्ली सरकार ने कोर्ट को बताया कि उसने 9 फरवरी 2022 के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। जिला जजों की अपीलीय पावर को 20 लाख रुपये तक बढ़ाने को 2 जनवरी 2024 को उपराज्यपाल ने भी हरी झंडी दे दी थी।

वहीं, जिला अदालतों की वित्तीय सीमा को 2 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये करने के फैसले पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। दिल्ली हाई कोर्ट की एक बेंच ने कहा कि दिल्ली में अब साधारण घरों की कीमत भी 2 करोड़ रुपये से ज्यादा हो गई है, इसलिए पुरानी सीमा को बदलना जरूरी है। कोर्ट ने माना कि 2015 के बाद से यह सीमा नहीं बदली गई, जिससे बहुत सारे मामले सीधे हाई कोर्ट पहुंच रहे हैं। एक सात सदस्यीय समिति इस सीमा को 20 करोड़ रुपये तक करने पर भी विचार कर रही है।

इस फैसले से नाराज दिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिएशन (DHCBA) ने न्यायिक काम से दूर रहने का फैसला किया है। वकीलों का कहना है कि अगर जिला अदालतों की सीमा 10 करोड़ रुपये हो गई, तो हाई कोर्ट के करीब 70 प्रतिशत मामले जिला अदालतों में चले जाएंगे। इससे हाई कोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले वकीलों के काम और उनके प्रोफेशनल जीवन पर बुरा असर पड़ेगा। इसी विरोध के चलते हाई कोर्ट के अधिवक्ताओं की हड़ताल जारी है।