Delhi जिला अदालत की वित्तीय अधिकारिता 11 साल बाद बढ़ी, अब 10 करोड़ तक के केस होंगे दाखिल

Delhi: दिल्ली की जिला अदालतों में अब बड़े वित्तीय मामलों की सुनवाई हो सकेगी। सरकार ने 11 साल के लंबे इंतजार के बाद जिला अदालतों की वित्तीय अधिकारिता (Financial Jurisdiction) को बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये कर दिया है। इस फैसले

Delhi: दिल्ली की जिला अदालतों में अब बड़े वित्तीय मामलों की सुनवाई हो सकेगी। सरकार ने 11 साल के लंबे इंतजार के बाद जिला अदालतों की वित्तीय अधिकारिता (Financial Jurisdiction) को बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये कर दिया है। इस फैसले से अब लोगों को छोटे और मध्यम स्तर के बड़े वित्तीय विवादों के लिए सीधे जिला अदालत का दरवाजा खटखटाने की सुविधा मिलेगी।

यह बदलाव 11 जुलाई 2026 को सामने आया है। इससे पहले साल 2015 में जिला अदालतों की यह सीमा 20 लाख रुपये से बढ़ाकर 2 करोड़ रुपये की गई थी। करीब एक दशक बाद हुए इस बदलाव पर बार एसोसिएशन और दिल्ली बार कोऑर्डिनेशन कमिटी ने अपनी खुशी जाहिर की है।

हालांकि, इस मामले में कानूनी गलियारों में अलग-अलग राय भी देखने को मिली है। दिल्ली उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन (DHCBA) इस वृद्धि का विरोध कर रहा है। DHCBA का मानना है कि इस तरह का बदलाव विधायी कार्य है और इससे जिला अदालतों पर काम का बोझ बढ़ेगा, साथ ही हाई कोर्ट के कामकाज पर भी असर पड़ेगा।

इस पूरे मामले से जुड़ी मुख्य बातें नीचे दी गई हैं:

विवरण जानकारी
वर्तमान वित्तीय सीमा 10 करोड़ रुपये
पिछली वित्तीय सीमा 2 करोड़ रुपये (2015 से लागू)
पिछला बदलाव कब हुआ 26 अक्टूबर 2015
प्रस्तावित मांग 20 करोड़ रुपये (समन्वय समिति द्वारा)
विरोध करने वाली संस्था दिल्ली उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन (DHCBA)

बता दें कि मई 2025 में जिला न्यायालय बार एसोसिएशनों की समन्वय समिति ने केंद्रीय कानून मंत्रालय और कानून आयोग को इस सीमा को 20 करोड़ रुपये तक करने का प्रस्ताव दिया था। इस बीच, दिल्ली हाई कोर्ट ने न्यायाधीशों की एक समिति को 2 करोड़ से 20 करोड़ रुपये तक की वृद्धि के प्रस्ताव पर रिपोर्ट देने की अनुमति दी है।