Delhi: दिल्ली की जिला अदालतों के बार एसोसिएशन ने अपनी प्रतीकात्मक हड़ताल वापस ले ली है। यह हड़ताल 14 मई 2026 को जिला अदालतों के आर्थिक अधिकार क्षेत्र यानी पेकुनिएरी ज्यूरिस्डिक्शन की सीमा बढ़ाने की मांग को लेकर शुरू की ग
Delhi: दिल्ली की जिला अदालतों के बार एसोसिएशन ने अपनी प्रतीकात्मक हड़ताल वापस ले ली है। यह हड़ताल 14 मई 2026 को जिला अदालतों के आर्थिक अधिकार क्षेत्र यानी पेकुनिएरी ज्यूरिस्डिक्शन की सीमा बढ़ाने की मांग को लेकर शुरू की गई थी। दिल्ली के सभी जिला अदालत बार एसोसिएशन की कोऑर्डिनेशन कमेटी ने इस विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया था, जिसे अब खत्म कर दिया गया है।
वकीलों की मुख्य मांग क्या है?
बार एसोसिएशन की सबसे बड़ी मांग यह है कि जिला अदालतों की आर्थिक सीमा को 2 करोड़ रुपये से बढ़ाकर कम से कम 20 करोड़ रुपये किया जाए। आखिरी बार साल 2015 में इस सीमा को 20 लाख से बढ़ाकर 2 करोड़ किया गया था। वकीलों का मानना है कि अगर यह सीमा बढ़ती है, तो Delhi High Court पर मुकदमों का बोझ कम होगा और आम लोगों को जिला अदालतों में जल्दी न्याय मिल सकेगा।
विरोध प्रदर्शन और अधिकारियों का क्या कहना है?
कोऑर्डिनेशन कमेटी के जनरल सेक्रेटरी एडवोकेट विजय बिश्नोई और साकेत बार एसोसिएशन के अनिल कुमार बैसोया समेत कई वकीलों ने इस हड़ताल का समर्थन किया था। उनका आरोप है कि दिल्ली हाई कोर्ट जिला अदालतों और वकीलों के मामलों में मनमाना रवैया अपना रहा है। दूसरी तरफ, Delhi High Court Bar Association (DHCBA) ने इस मांग का विरोध किया है। उनका कहना है कि सीमा को 20 करोड़ करने से न्यायिक व्यवस्था और संतुलन बिगड़ सकता है। फिलहाल हाई कोर्ट के पांच जजों की एक कमेटी इस प्रस्ताव की जांच कर रही है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
वकील किस बात के लिए हड़ताल पर थे?
वकील जिला अदालतों की आर्थिक सीमा (Pecuniary Jurisdiction) को 2 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 20 करोड़ रुपये करने की मांग कर रहे थे ताकि हाई कोर्ट में भीड़ कम हो सके।
क्या यह हड़ताल अभी भी जारी है?
नहीं, दिल्ली की जिला अदालत बार एसोसिएशन ने 14 मई 2026 को अपनी यह प्रतीकात्मक हड़ताल वापस ले ली है।