Delhi: दिल्ली के बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक जरूरी खबर है। दिल्ली बिजली नियामक आयोग (DERC) ने करीब 38,500 करोड़ रुपये की रेगुलेटरी एसेट्स की वसूली के लिए ट्रिब्यूनल से और समय मांगा है। DERC चाहता है कि उसे यह प्रक्रिया शु
Delhi: दिल्ली के बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक जरूरी खबर है। दिल्ली बिजली नियामक आयोग (DERC) ने करीब 38,500 करोड़ रुपये की रेगुलेटरी एसेट्स की वसूली के लिए ट्रिब्यूनल से और समय मांगा है। DERC चाहता है कि उसे यह प्रक्रिया शुरू करने के लिए 1 जुलाई 2026 तक की मोहलत मिले। अगर यह वसूली शुरू होती है, तो दिल्ली वालों के बिजली बिल में बढ़ोतरी हो सकती है।
क्या है यह पूरा मामला और क्यों बढ़ सकते हैं दाम?
रेगुलेटरी एसेट्स वह पैसा होता है जो बिजली कंपनियों (Discoms) ने बिजली खरीदने और बांटने पर खर्च किया, लेकिन उसे बिजली दरों (Tariff) के जरिए वसूल नहीं कर पाईं। अक्सर सरकारें वोट बैंक या अन्य कारणों से बिजली दाम नहीं बढ़ातीं, जिससे यह बकाया राशि जमा हो जाती है। अब BSES यमुना, BSES राजधानी और टाटा पावर जैसी कंपनियां इस पुराने बकाया पैसे की मांग कर रही हैं। सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही आदेश दिया है कि इस रकम को 1 अप्रैल 2024 से 31 मार्च 2031 के बीच सात सालों में वसूल किया जाए।
DERC ने समय क्यों मांगा और ट्रिब्यूनल ने क्या कहा?
DERC का कहना है कि 2023-24 के वित्तीय वर्ष के लिए ‘ट्रू-अप’ ऑर्डर पूरा करना जरूरी है, जो 30 जून तक होगा। इसके बाद ही वसूली की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। हालांकि, अपीलेट ट्रिब्यूनल फॉर इलेक्ट्रिसिटी (APTEL) ने इस देरी पर नाराजगी जताई है। ट्रिब्यूनल ने DERC के रवैये को गलत बताया और कहा कि देरी की वजह से यह बकाया राशि और बढ़ती जाएगी, जिसका सीधा बोझ आम जनता की जेब पर पड़ेगा।
वसूली की प्रक्रिया और ऑडिट के नियम
- सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरी रकम के लिए एक सख्त और गहन ऑडिट का आदेश दिया है।
- APTEL ने निर्देश दिया कि DERC एक स्वतंत्र चार्टर्ड अकाउंटेंट नियुक्त करे जो तीन महीने में ऑडिट पूरा करे।
- बिजली कंपनियों ने 2007 से जमा इस बकाया की वसूली के लिए अलग से याचिका लगाई है, जिस पर 21 मई 2026 को सुनवाई होगी।
- नए नियमों के मुताबिक, रेगुलेटरी एसेट्स को अब तय समय सीमा के भीतर वसूलना अनिवार्य है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
रेगुलेटरी एसेट्स क्या होते हैं और इससे आम आदमी पर क्या असर पड़ेगा?
यह वह पैसा है जो बिजली कंपनियों ने खर्च किया लेकिन उपभोक्ताओं से वसूल नहीं किया। जब कंपनियां इसे वसूलेंगी, तो बिजली बिल में ‘रेगुलेटरी एसेट सरचार्ज’ जुड़कर आएगा, जिससे मंथली बिल बढ़ जाएंगे।
कितनी रकम की वसूली की बात हो रही है और समय सीमा क्या है?
लगभग 38,500 करोड़ रुपये की वसूली की बात हो रही है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार इसे अप्रैल 2024 से मार्च 2031 तक सात साल की अवधि में वसूला जाना है।