Delhi-Dehradun Expressway: दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर जानवरों के लिए बनाए गए खास रास्तों का असर अब दिखने लगा है। हाल ही में एक वीडियो सामने आया है जिसमें एक हाथी बिना किसी डर के अंडरपास से गुजरता नजर आ रहा है। यह रास
Delhi-Dehradun Expressway: दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर जानवरों के लिए बनाए गए खास रास्तों का असर अब दिखने लगा है। हाल ही में एक वीडियो सामने आया है जिसमें एक हाथी बिना किसी डर के अंडरपास से गुजरता नजर आ रहा है। यह रास्ता जानवरों को सुरक्षित तरीके से एक जंगल से दूसरे जंगल तक ले जाने के लिए बनाया गया है ताकि वे सड़क हादसों का शिकार न हों।
क्या है यह वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर और कैसे काम करता है
NHAI और Wildlife Institute of India (WII) ने मिलकर इस एक्सप्रेसवे पर एशिया का सबसे लंबा वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर बनाया है। सहारणपुर के पास गणेशपुर और अशरोडी के बीच 20 किलोमीटर के हिस्से में 12 किलोमीटर का हिस्सा जमीन से ऊपर (elevated) बनाया गया है। इसकी ऊंचाई 6 से 7 मीटर रखी गई है ताकि हाथी जैसे बड़े जानवर भी इसके नीचे से आराम से निकल सकें। इसमें कुल 8 एनिमल पैसेज और 2 खास एलीफेंट अंडरपास बनाए गए हैं।
कितने जानवरों ने इस्तेमाल किया यह रास्ता
WII और NHAI की ‘Landscapes Reconnected’ रिपोर्ट के मुताबिक, 40 दिनों की निगरानी में कैमरा ट्रैप और रिकॉर्डर्स की मदद से 18 अलग-अलग प्रजातियों के जानवरों की आवाजाही दर्ज की गई। इस दौरान हाथी कम से कम 60 बार इस कॉरिडोर का इस्तेमाल करते दिखे। इनके अलावा गोल्डन जैकल, नीलगाय, सांभर और चित्तीदार हिरण भी इन रास्तों से गुजरते पाए गए।
इंसानों और जानवरों के बीच टकराव कम होगा
शिवालिक के संवेदनशील इलाके में इस बुनियादी ढांचे से जानवरों के प्राकृतिक घर नहीं टूटेंगे। इससे सड़क पर जानवरों के आने से होने वाले हादसों में कमी आएगी और इंसानों व वन्यजीवों के बीच होने वाले टकराव भी कम होंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उद्घाटन से पहले सहारणपुर में इस एलिवेटेड कॉरिडोर का निरीक्षण किया था।
Frequently Asked Questions (FAQs)
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर कितना लंबा है?
यह एशिया का सबसे लंबा वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर है। इसमें गणेशपुर और अशरोडी के बीच 20 किमी के स्ट्रेच में 12 किमी का हिस्सा एलिवेटेड बनाया गया है।
इस कॉरिडोर से किन जानवरों को फायदा होगा?
यह मुख्य रूप से हाथियों, नीलगाय, सांभर और हिरण जैसे जानवरों के लिए बनाया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, हाथियों ने इसे 60 से ज्यादा बार इस्तेमाल किया है।