Delhi: दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने संगठित अपराध चलाने वाले राजू मीणा गैंग के खिलाफ एक बहुत बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने साकेत कोर्ट में 3,000 से ज्यादा पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है। इस गिरोह पर मकोका (MCOCA) लगाय
Delhi: दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने संगठित अपराध चलाने वाले राजू मीणा गैंग के खिलाफ एक बहुत बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने साकेत कोर्ट में 3,000 से ज्यादा पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है। इस गिरोह पर मकोका (MCOCA) लगाया गया है, जो कि बहुत सख्त कानून है। इस मामले में गैंग के सरगना की पत्नी को भी गिरफ्तार किया गया है।
राजू मीणा गैंग कैसे करता था काम
यह गिरोह 2015 से सक्रिय था और लोगों को डरा-धमका कर पैसे वसूलता था। इनका तरीका बहुत अजीब था, ये छिपे हुए कैमरों से वीडियो बनाते थे और फिर वीडियो के साथ छेड़छाड़ कर लोगों को फंसाते थे। इनके निशाने पर आम नागरिक, ट्रैफिक पुलिस के जवान और सरकारी अधिकारी रहते थे। पुलिस के मुताबिक, इस गैंग ने धोखाधड़ी से 10 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति बनाई है।
कौन-कौन हुए गिरफ्तार और क्या है कानूनी स्थिति
पुलिस ने इस सिंडिकेट के मुख्य आरोपी राजकुमार उर्फ राजू मीणा को 8 दिसंबर 2025 को पकड़ा था। उसके बाद उसके साथी मुकेश कुमार उर्फ पकौड़ी, संजय गुप्ता और आमिर चौधरी को भी गिरफ्तार किया गया। राजू मीणा की पत्नी सुरेखा रानी को भी मकोका के तहत गिरफ्तार किया गया है क्योंकि वह गैंग के कामों में मदद करती थी। कानूनी जानकारों का कहना है कि मकोका कानून के तहत आरोपियों को अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) नहीं मिल सकती है।
पुलिस की जांच और कोर्ट की कार्रवाई
क्राइम ब्रांच की एंटी-रॉबरी एंड स्नैचिंग सेल (ARSC) ने इस पूरे मामले की जांच की है। डीसीपी संजीव कुमार यादव और स्पेशल कमिश्नर देवेश श्रीवास्तव ने बताया कि चार्जशीट में इस गिरोह के आतंक और काम करने के तरीके के पुख्ता सबूत दिए गए हैं। यह चार्जशीट साकेत कोर्ट के जज सोनू अग्निहोत्री की अदालत में पेश की गई है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
राजू मीणा गैंग किन लोगों को निशाना बनाता था
यह गिरोह मुख्य रूप से आम नागरिकों, ट्रैफिक पुलिस के कर्मियों और अन्य सरकारी अधिकारियों को डराकर और फर्जी शिकायतें करके पैसे वसूलता था।
मकोका (MCOCA) कानून के तहत क्या प्रावधान है
मकोका एक सख्त कानून है जो संगठित अपराधों के लिए लगाया जाता है। इस कानून के तहत आरोपियों को अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) मिलने का प्रावधान नहीं है।