Delhi CPA घोटाला: 19 विभागों के डॉक्टर ACB की रडार पर, पसंदीदा वेंडर्स को फायदा पहुंचाने के लिए बदले गए नियम
Delhi: दिल्ली सरकार की केंद्रीय खरीद एजेंसी (CPA) में हुए करोड़ों रुपये के घोटाले की जांच अब और गहरी हो गई है। एंटी-करप्शन ब्रांच (ACB) ने इस मामले में 19 अलग-अलग विभागों के डॉक्टरों और तकनीकी स्पेसिफिकेशन कमेटी को अपनी
Delhi: दिल्ली सरकार की केंद्रीय खरीद एजेंसी (CPA) में हुए करोड़ों रुपये के घोटाले की जांच अब और गहरी हो गई है। एंटी-करप्शन ब्रांच (ACB) ने इस मामले में 19 अलग-अलग विभागों के डॉक्टरों और तकनीकी स्पेसिफिकेशन कमेटी को अपनी जांच के दायरे में लिया है। आरोप है कि कुछ डॉक्टरों और वेंडर्स ने मिलकर नियमों में हेराफेरी की ताकि चुनिंदा कंपनियों को फायदा पहुंचाया जा सके।
जांच में यह बात सामने आई है कि दवाओं, सर्जिकल उपकरणों और अन्य मेडिकल सामानों की खरीद के लिए तकनीकी मानकों को इस तरह बदला गया कि बाजार में प्रतिस्पर्धा खत्म हो गई। इस मिलीभगत की वजह से सरकारी खजाने को करीब 600 से 650 करोड़ रुपये का भारी नुकसान हुआ है। इस पूरे मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता के तहत 2 जून 2026 को FIR दर्ज की गई थी।
इस घोटाले में बड़े अधिकारियों पर भी गाज गिरी है। CPA के पूर्व हेड ऑफ ऑफिस डॉ. विनोद कुमार रंगा को 18 जून 2026 को गिरफ्तार किया गया, जिन्हें बाद में 4 दिनों की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया। इसके अलावा, पूर्व DGHS निदेशक डॉ. वत्सला अग्रवाल को भी निलंबित किया जा चुका है और ACB ने दस्तावेजों की तलाश में उनके घर पर छापेमारी की है। सूत्रों के मुताबिक, इस मामले में 100 से ज्यादा डॉक्टर और अधिकारी जांच एजेंसियों की रडार पर हैं।
यह भी पता चला है कि पोर्टेबल एक्स-रे मशीन, बेडशीट, लिनेन आइटम, सी-आर्म रेडियोलॉजिकल उपकरण और एनेस्थीसिया वर्क स्टेशन जैसी जरूरी चीजों की खरीद बाजार भाव से काफी ज्यादा कीमत पर की गई थी। वहीं, इस मामले से जुड़ी कई जरूरी फाइलें डॉ. विनोद कुमार रंगा के निजी कब्जे से गायब मिली हैं, जिससे जांच में मुश्किलें आ रही हैं। दिल्ली सरकार ने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी।