Delhi: नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की ‘क्राइम इन इंडिया 2024’ रिपोर्ट ने राजधानी की न्यायिक व्यवस्था की पोल खोल दी है। दिल्ली की अदालतों में लंबित मामलों की दर 90 फीसदी के पार पहुंच गई है। सबसे ज्यादा
Delhi: नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की ‘क्राइम इन इंडिया 2024’ रिपोर्ट ने राजधानी की न्यायिक व्यवस्था की पोल खोल दी है। दिल्ली की अदालतों में लंबित मामलों की दर 90 फीसदी के पार पहुंच गई है। सबसे ज्यादा चिंता हत्या के मामलों को लेकर है, जहां पेंडिंग केस की दर 98 प्रतिशत तक जा पहुंची है, जिससे आम लोगों को न्याय मिलने में भारी देरी हो रही है।
अदालतों में कितने केस पेंडिंग हैं और क्या है बोझ?
दिल्ली की निचली अदालतों में कुल 15.6 लाख मामले लंबित हैं। इनमें से 13.5 लाख आपराधिक मामले हैं और 2.18 लाख सिविल केस हैं। काम का दबाव इतना ज्यादा है कि एक जज के ऊपर औसतन 2,200 मामलों का बोझ है। हत्या के मामलों की बात करें तो 2024 में 504 केस दर्ज हुए, जिनमें से साल के अंत तक 451 मामले अभी भी विचाराधीन थे।
NCRB रिपोर्ट में दिल्ली के अपराधों का क्या डेटा आया है?
रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली महानगरीय शहरों में अपराध के मामले में टॉप पर है। यहां 2024 में कुल 2.75 लाख से ज्यादा आपराधिक मामले दर्ज हुए। चोरी के मामले सबसे ज्यादा चौंकाने वाले हैं, जहां दिल्ली में 1,80,973 केस दर्ज हुए, जो देश की कुल चोरी का लगभग 73% है। वहीं, नाबालिगों द्वारा किए गए अपराधों की संख्या 2,306 रही, जो किसी भी महानगर में सबसे अधिक है।
पुलिस की कार्रवाई और कोर्ट के नए निर्देश क्या हैं?
दिल्ली पुलिस ने हत्या के मामलों में 90.8% चार्जशीट दाखिल की है, जो राष्ट्रीय औसत से बेहतर है। हालांकि, अपहरण के मामलों में यह दर सिर्फ 8.5% रही। इस स्थिति को सुधारने के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय ने NCRB और NIC को निर्देश दिया है कि वे आपराधिक रिकॉर्ड और लंबित मामलों के डेटा को एक साथ जोड़ने की संभावना तलाशें ताकि प्रक्रिया तेज हो सके।
Frequently Asked Questions (FAQs)
दिल्ली में हत्या के मामलों की सजा दर और पेंडिंग रेट क्या है?
NCRB 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में हत्या के मामलों में सजा की दर 62.5% रही, लेकिन लंबित मामलों की दर 98% तक पहुंच गई है।
दिल्ली की अदालतों में जजों पर कितना काम है?
दिल्ली की निचली अदालतों में कुल 15.6 लाख मामले लंबित हैं और औसतन एक न्यायाधीश पर 2,200 मामलों का बोझ है।