Finance : दिल्ली की एक अदालत ने Google और Meta जैसे बड़े प्लेटफॉर्म्स को आदेश दिया है कि वे बिजनेसमैन मनोज केसरिचंद Sandesara और उनके परिवार से जुड़ी मानहानि वाली खबरों को इंटरनेट से हटाएं। कोर्ट ने कहा है कि इन कंपनियों
Finance : दिल्ली की एक अदालत ने Google और Meta जैसे बड़े प्लेटफॉर्म्स को आदेश दिया है कि वे बिजनेसमैन मनोज केसरिचंद Sandesara और उनके परिवार से जुड़ी मानहानि वाली खबरों को इंटरनेट से हटाएं। कोर्ट ने कहा है कि इन कंपनियों को 36 घंटे के भीतर संबंधित लिंक्स (URLs) को डी-इंडेक्स और डी-लिस्ट करना होगा ताकि लोगों को ये खबरें न दिखें।
अदालत ने यह आदेश क्यों दिया?
तिस हजारी कोर्ट की सीनियर सिविल जज रिचा शर्मा ने यह फैसला सुनाया है। कोर्ट का मानना है कि बोलने की आजादी जरूरी है, लेकिन किसी व्यक्ति की इज्जत और प्राइवेसी का अधिकार भी उतना ही महत्वपूर्ण है। कोर्ट ने कहा कि मामले में बदलाव आने के बाद भी अगर पुरानी खबरें इंटरनेट पर रहती हैं, तो इससे परिवार की प्रतिष्ठा को भारी नुकसान हो सकता है, जिसकी भरपाई पैसों से नहीं की जा सकती।
Sterling Biotech केस और सुप्रीम कोर्ट का फैसला क्या था?
यह पूरा मामला Sterling Biotech ग्रुप के बैंक फ्रॉड से जुड़ा है। इस मामले में अब तक ये अहम बातें सामने आई हैं:
- नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने नितिन और चेतन Sandesara के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही खत्म करने की अनुमति दी थी।
- इस शर्त पर सहमति बनी थी कि प्रमोटर्स कुल 5,100 करोड़ रुपये का भुगतान करेंगे।
- यह रकम 17 दिसंबर 2025 तक जमा कर दी गई थी।
- 24 मार्च 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने इस रकम को संबंधित बैंकों को बांटने का आदेश दिया।
अब आगे क्या होगा और SEBI की क्या भूमिका है?
दिल्ली कोर्ट ने इस मामले में 20 अप्रैल 2026 की तारीख तय की है। वहीं, दूसरी तरफ सुप्रीम कोर्ट ने SEBI से इस मामले में जवाब मांगा है। Sandesara भाइयों ने SEBI की जांच बंद न करने को चुनौती दी है। SEBI इस बात की जांच कर रहा है कि क्या विदेशी बैंकों से लिए गए लोन को निवेश बताकर कंपनी में डाला गया था जिससे निवेशकों को गुमराह किया गया हो।