Delhi: राजधानी की Rouse Avenue Court ने एक पुराने मामले में बीजेपी सांसद Yogendra Chandolia को बड़ी राहत दी है। साल 2020 में एक ट्रैफिक पुलिसकर्मी के साथ मारपीट और ड्यूटी में बाधा डालने के आरोप में उन पर केस चल रहा था। क
Delhi: राजधानी की Rouse Avenue Court ने एक पुराने मामले में बीजेपी सांसद Yogendra Chandolia को बड़ी राहत दी है। साल 2020 में एक ट्रैफिक पुलिसकर्मी के साथ मारपीट और ड्यूटी में बाधा डालने के आरोप में उन पर केस चल रहा था। कोर्ट ने अब उन्हें इस मामले से पूरी तरह बरी यानी डिस्चार्ज कर दिया है।
क्या था पूरा मामला और क्यों हुआ विवाद
यह घटना 7 अक्टूबर 2020 की है, जो Karol Bagh के Tank Road इलाके में Prasad Nagar पुलिस स्टेशन के पास हुई थी। आरोप था कि Yogendra Chandolia ने ट्रैफिक हेड कॉन्स्टेबल Raj Kumar को ड्यूटी करने से रोका और उनके साथ बदतमीजी की। शिकायत में कहा गया था कि उन्होंने कॉन्स्टेबल को क्रेन से खींचने की कोशिश की, भीड़ को उकसाया और उनके एक साथी ने पुलिसकर्मी का फोन छीन लिया था।
कोर्ट ने किस आधार पर दिया फैसला
ACJM Neha Mittal ने यह फैसला ‘Devendra Kumar’ के केस में दिए गए सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले के आधार पर सुनाया। कोर्ट ने कहा कि कानून के मुताबिक एक ही केस में अपराधों को अलग-अलग करके कार्रवाई नहीं की जा सकती। चूंकि उन्हें Section 186 IPC के तहत डिस्चार्ज किया जा चुका था, इसलिए बाकी धाराओं (341, 353, 356, 34 IPC) में भी उन पर केस नहीं चलाया जा सकता। इसी कानूनी वजह से उन्हें इस पूरे मामले से मुक्त कर दिया गया।
पहले क्या हुआ था कानूनी प्रोसेस में
इस केस में पहले 3 मई 2025 को एक मजिस्ट्रेट कोर्ट ने Yogendra Chandolia पर कुछ धाराओं में चार्ज फ्रेम करने का आदेश दिया था। इसके बाद उन्होंने इस फैसले को चुनौती दी थी, लेकिन अक्टूबर 2025 में सेशन कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी थी। अब लेटेस्ट आदेश में कानूनी बारीकियों और सुप्रीम कोर्ट के गाइडलाइंस को देखते हुए उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
Yogendra Chandolia पर क्या आरोप लगे थे
उन पर 2020 में Karol Bagh इलाके में ट्रैफिक हेड कॉन्स्टेबल Raj Kumar की ड्यूटी में बाधा डालने, उनके साथ मारपीट करने और गलत तरीके से रोकने के आरोप लगे थे।
कोर्ट ने उन्हें डिस्चार्ज क्यों किया
कोर्ट ने Devendra Kumar जजमेंट का हवाला दिया, जिसमें कहा गया है कि Section 195 CrPC के तहत कुछ अपराधों में पुलिसकर्मी की औपचारिक शिकायत जरूरी होती है और केस को टुकड़ों में बांटकर कार्रवाई नहीं की जा सकती।