Delhi: शादी-ब्याह के मौके पर समय की कितनी अहमियत होती है, इसे देखते हुए दिल्ली के एक कंज्यूमर कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। एक ट्रांसपोर्ट सर्विस प्रोवाइडर की लापरवाही की वजह से बारात घंटों देरी से पहुंची, जिसके बाद कोर
Delhi: शादी-ब्याह के मौके पर समय की कितनी अहमियत होती है, इसे देखते हुए दिल्ली के एक कंज्यूमर कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। एक ट्रांसपोर्ट सर्विस प्रोवाइडर की लापरवाही की वजह से बारात घंटों देरी से पहुंची, जिसके बाद कोर्ट ने पीड़ित व्यक्ति को रिफंड और मुआवजा देने का आदेश दिया है। यह मामला बस खराब होने और सर्विस में कमी से जुड़ा है।
क्या था पूरा मामला और क्यों हुई देरी
यह मामला साल 2022 का है, जब एक व्यक्ति ने 8 दिसंबर 2022 को होने वाली अपनी शादी की बारात के लिए 25 अक्टूबर को ही बस बुक कर ली थी। यात्रा के दौरान बस खराब हो गई, जिसकी वजह से बारात अपनी मंजिल पर रात के करीब 3:00 बजे पहुंची। इस देरी की वजह से परिवार और मेहमानों को काफी मानसिक परेशानी और शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा।
कोर्ट ने कितना जुर्माना और मुआवजा लगाया
District Consumer Disputes Redressal Commission (Central), Delhi ने इस मामले में ट्रांसपोर्टर को दोषी पाया। कोर्ट ने आदेश दिया कि कंपनी ग्राहक को ₹14,000 की बुकिंग राशि 6% सालाना ब्याज के साथ वापस करे। साथ ही, मानसिक परेशानी और प्रताड़ना के लिए ₹50,000 का अलग से मुआवजा देने को कहा गया है। कुल मिलाकर यह राशि ₹64,000 के करीब बैठती है।
कोर्ट की सख्त चेतावनी और समय सीमा
कमीशन की प्रेसिडेंट Divya Jyoti Jaipuriar और सदस्य Rashmi Bansal ने साफ किया कि शादी जैसे संवेदनशील कार्यक्रमों में देरी बर्दाश्त नहीं की जा सकती। कोर्ट ने ट्रांसपोर्टर को यह पूरा भुगतान 30 दिनों के भीतर करने का निर्देश दिया है। अगर कंपनी तय समय में पैसा नहीं चुकाती है, तो उसे 9% सालाना ब्याज देना होगा।
Frequently Asked Questions (FAQs)
कंज्यूमर कोर्ट ने ट्रांसपोर्टर पर कुल कितना जुर्माना लगाया है?
कोर्ट ने ₹14,000 का रिफंड (6% ब्याज के साथ) और ₹50,000 मानसिक परेशानी के लिए मुआवजा देने का आदेश दिया है, जो कुल ₹64,000 के करीब है।
यह मामला किस तारीख की घटना से जुड़ा है?
यह मामला 8 दिसंबर 2022 को होने वाली एक शादी की बारात से जुड़ा है, जिसके लिए बस की बुकिंग 25 अक्टूबर 2022 को की गई थी।