Delhi: राजधानी दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण को रोकने के लिए सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं। अब शहर के सभी निर्माण और तोड़फोड़ वाली जगहों पर धूल रोकने के लिए खास तौर पर हाई-डेनसिटी जाली लगाना जरूरी होगा। इसके साथ ही सरकार ने
Delhi: राजधानी दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण को रोकने के लिए सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं। अब शहर के सभी निर्माण और तोड़फोड़ वाली जगहों पर धूल रोकने के लिए खास तौर पर हाई-डेनसिटी जाली लगाना जरूरी होगा। इसके साथ ही सरकार ने डिजिटल निगरानी के लिए ‘डस्ट पोर्टल 2.0’ की शुरुआत की है ताकि नियमों का पालन सही से हो सके।
क्या हैं जाली लगाने के नए नियम?
दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) ने आदेश दिया है कि अब सभी निर्माण स्थलों पर कम से कम 100 GSM मोटी हरी जाली (डस्ट स्क्रीन) लगाना अनिवार्य होगा। पहले तिरपाल या किसी भी ग्रीन नेट का इस्तेमाल होता था, लेकिन अब गुणवत्ता का मानक तय कर दिया गया है। इस कदम से पीएम 2.5 और पीएम 10 जैसे हानिकारक कणों को हवा में फैलने से रोकने में मदद मिलेगी।
‘डस्ट पोर्टल 2.0’ कैसे करेगा काम?
निर्माण स्थलों की निगरानी अब डिजिटल तरीके से होगी। ‘डस्ट पोर्टल 2.0’ के जरिए सभी C&D साइट्स की मैपिंग की जाएगी। इसमें AI-संचालित अलर्ट और QR-कोडेड सत्यापन जैसी सुविधाएं होंगी, जिससे अधिकारियों को वास्तविक समय में पता चल सकेगा कि साइट पर नियमों का पालन हो रहा है या नहीं। सभी निर्माण स्थलों के लिए इस पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी है।
किन एजेंसियों को देना होगा पालन?
यह नियम तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं। दिल्ली सरकार ने यह आदेश MCD, NDMC, DDA, DMRC, CPWD और PWD जैसी सभी प्रमुख एजेंसियों को भेज दिया है। पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने बताया कि सरकार प्रदूषण कम करने के लिए तकनीक और सख्त निगरानी वाली रणनीति पर काम कर रही है। यह पूरा सिस्टम एयर क्वालिटी मैनेजमेंट आयोग (CAQM) के दिशा-निर्देशों के अनुसार बनाया गया है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
निर्माण स्थलों पर अब किस तरह की जाली लगाना जरूरी है?
अब सभी निर्माण और तोड़फोड़ स्थलों पर कम से कम 100 GSM मोटी हरी जाली (डस्ट स्क्रीन) लगाना अनिवार्य कर दिया गया है ताकि धूल प्रदूषण कम हो सके।
डस्ट पोर्टल 2.0 क्या है और इसका क्या फायदा होगा?
यह एक डिजिटल निगरानी सिस्टम है जिसमें GIS मैपिंग, AI अलर्ट और QR कोड सत्यापन की सुविधा है। इससे दिल्ली की सभी निर्माण साइट्स की केंद्रीकृत निगरानी आसान हो जाएगी।