Delhi: राजधानी दिल्ली में मई महीने की हवा को पिछले कई सालों का सबसे साफ बताया जा रहा है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह पूरी तरह सच नहीं है। जहां सरकारी आंकड़े हवा में सुधार दिखा रहे हैं, वहीं PM10, ओज़ोन और सल्फर डाइ
Delhi: राजधानी दिल्ली में मई महीने की हवा को पिछले कई सालों का सबसे साफ बताया जा रहा है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह पूरी तरह सच नहीं है। जहां सरकारी आंकड़े हवा में सुधार दिखा रहे हैं, वहीं PM10, ओज़ोन और सल्फर डाइऑक्साइड जैसे प्रदूषक अब भी लोगों की सेहत के लिए खतरा बने हुए हैं। कई जानकारों का मानना है कि यह सुधार प्रदूषण कम होने से नहीं बल्कि मौसम की वजह से हुआ है।
क्या वाकई दिल्ली की हवा साफ हुई है?
CAQM के मुताबिक, मई 2026 में औसत AQI 157 रहा, जो पिछले आठ सालों (2020-21 को छोड़कर) में सबसे कम है। लेकिन सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (CSE) और CREA जैसे संगठनों ने इस दावे पर सवाल उठाए हैं। एनवायरोकैटेलिस्ट्स के सुनील दहिया के अनुसार, PM2.5 का स्तर इसलिए कम हुआ क्योंकि उस दौरान हवाएं तेज चलीं और बारिश हुई, जबकि PM10 का स्तर पहले जैसा ही बना रहा।
ओज़ोन और SO2 का बढ़ता खतरा क्या है?
मई 2026 में दिल्ली के 45 में से 24 निगरानी स्टेशनों ने ओज़ोन के मानकों का उल्लंघन किया। पूसा जैसे इलाकों में ओज़ोन की मात्रा तय सीमा से तीन गुना ज्यादा पाई गई। इसके अलावा, सल्फर डाइऑक्साइड (SO2) का स्तर भी बढ़ा है, जो मई 2022 में 11 µg/m³ था और मई 2026 में बढ़कर 18 µg/m³ हो गया। ओज़ोन का यह स्तर गाड़ियों के धुएं और फैक्ट्रियों के उत्सर्जन के कारण बढ़ता है।
निगरानी स्टेशनों के डेटा पर क्यों उठ रहे सवाल?
CAG की रिपोर्ट और अन्य जांचों में सामने आया है कि दिल्ली के कई वायु निगरानी स्टेशन गलत जगह लगाए गए हैं। कुछ स्टेशन पेड़ों या ऊंची इमारतों के बहुत करीब हैं, जिससे डेटा सही नहीं मिलता। रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली का करीब 65% हिस्सा ऐसे स्टेशनों की वजह से बिना सही जानकारी के है। कुछ जगहों पर तो रीडिंग कम दिखाने के लिए स्टेशनों के पास पानी के स्प्रिंकलर चलाने की बात भी सामने आई है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
मई 2026 में दिल्ली का औसत AQI कितना रहा?
CAQM के आंकड़ों के अनुसार, मई 2026 में दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 157 दर्ज किया गया, जो पिछले आठ वर्षों में सबसे कम है।
ओज़ोन प्रदूषण बढ़ने का मुख्य कारण क्या है?
गर्मियों में तेज धूप के कारण गाड़ियों के धुएं, औद्योगिक उत्सर्जन और खुले में कचरा जलाने से निकलने वाले नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx) और VOCs के बीच रासायनिक प्रतिक्रिया होती है, जिससे जमीनी स्तर पर ओज़ोन बनता है।