Delhi: सीबीएसई क्लास 12वीं की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। Delhi Parents Association की सदस्य अपराजिता गौतम ने दावा किया है कि पोस्ट ग्रेजुएट टीचर्स (PGTs) की कमी की वजह से ट्रेंड ग
Delhi: सीबीएसई क्लास 12वीं की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। Delhi Parents Association की सदस्य अपराजिता गौतम ने दावा किया है कि पोस्ट ग्रेजुएट टीचर्स (PGTs) की कमी की वजह से ट्रेंड ग्रेजुएट टीचर्स (TGTs) से कॉपियां चेक कराई गईं। इस वजह से कई छात्रों के नंबर कम आए हैं और मूल्यांकन में गड़बड़ियां हुई हैं।
TGT शिक्षकों से कॉपी चेक कराने पर क्या है विवाद
अपराजिता गौतम के मुताबिक, नियम के अनुसार क्लास 12 की कॉपियां PGT शिक्षकों को ही जांचनी चाहिए थीं। लेकिन शिक्षकों की कमी के कारण TGT शिक्षकों को यह काम सौंपा गया, जो आमतौर पर कक्षा 6 से 10 तक पढ़ाते हैं। दावा है कि TGT शिक्षकों को मार्किंग स्कीम की पूरी समझ नहीं थी, जिससे छात्रों के नंबरों पर बुरा असर पड़ा है।
On-Screen Marking (OSM) पोर्टल में क्या रही कमियां
मूल्यांकन के लिए इस्तेमाल किए गए OSM पोर्टल को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। बताया गया है कि इस सिस्टम को बिना किसी प्रॉपर टेस्ट रन के अचानक लागू कर दिया गया। शिक्षकों की ट्रेनिंग जल्दबाजी में हुई और कोई मॉनिटरिंग भी नहीं की गई। जनवरी में हुए ड्राई रन के दौरान शिक्षकों ने शिकायत की थी कि यह केवल सर्वर की क्षमता जांचने के लिए था, जबकि असल चुनौतियों पर ध्यान नहीं दिया गया।
अधिकारियों और शिक्षक संघों का क्या कहना है
इस मामले में सीबीएसई के परीक्षा नियंत्रक समयम भारद्वाज ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। वहीं, स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग के सचिव संजय कुमार ने 18 मई को कहा था कि सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा गया है और गलती की कोई गुंजाइश नहीं है। दूसरी तरफ, Government School Teachers Association (GSTA) ने कहा है कि वे तकनीकी दिक्कतों को दूर करने के लिए कॉपियों की दोबारा मैनुअल जांच करने को तैयार हैं।
Frequently Asked Questions (FAQs)
क्लास 12 की कॉपियां किन शिक्षकों ने जांचीं?
दावा किया गया है कि PGT शिक्षकों की कमी के कारण TGT शिक्षकों ने क्लास 12 की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन किया है।
OSM पोर्टल को लेकर क्या शिकायतें हैं?
शिकायत है कि On-Screen Marking पोर्टल बिना सही टेस्टिंग के लागू किया गया और शिक्षकों को इसकी पर्याप्त ट्रेनिंग नहीं दी गई थी।