Delhi में CJP प्रोटेस्ट केस में FIR होने पर क्या होगा, पासपोर्ट और नौकरी पर असर को लेकर जानिए कानूनी नियम
Delhi: दिल्ली में Cockroach Janta Party (CJP) के विरोध प्रदर्शनों में शामिल युवाओं के खिलाफ पुलिस ने कई FIR दर्ज की हैं। ऐसे में बहुत से लोग इस बात से परेशान हैं कि क्या FIR होने से उनका पासपोर्ट रुक जाएगा या सरकारी-प्रा
Delhi: दिल्ली में Cockroach Janta Party (CJP) के विरोध प्रदर्शनों में शामिल युवाओं के खिलाफ पुलिस ने कई FIR दर्ज की हैं। ऐसे में बहुत से लोग इस बात से परेशान हैं कि क्या FIR होने से उनका पासपोर्ट रुक जाएगा या सरकारी-प्राइवेट नौकरी मिलने में दिक्कत आएगी। कानूनी जानकारों ने अब इस पूरे मामले पर स्थिति साफ की है ताकि आम लोग अपनी कानूनी स्थिति समझ सकें।
पासपोर्ट के नियमों की बात करें तो सिर्फ FIR दर्ज होने से पासपोर्ट बनने या रिन्यू होने पर रोक नहीं लगती है। Indian Passports Act, 1967 के सेक्शन 6(2)(f) के मुताबिक, पासपोर्ट तब रोका जा सकता है जब किसी कोर्ट में आपराधिक मामला लंबित हो। जब तक पुलिस चार्जशीट दाखिल नहीं करती और कोर्ट उस पर संज्ञान नहीं लेता, तब तक उसे लंबित कार्यवाही नहीं माना जाता। हालांकि, आवेदन करते समय FIR की जानकारी देना जरूरी है, क्योंकि जानकारी छिपाने पर पुलिस वेरिफिकेशन के दौरान समस्या हो सकती है।
नौकरी और करियर पर इसके असर को लेकर वकीलों ने चिंता जताई है। सरकारी और प्राइवेट दोनों सेक्टरों में बैकग्राउंड वेरिफिकेशन होता है। ऐसे में भले ही दोष सिद्ध न हुआ हो, लेकिन FIR होने से हायर एजुकेशन, विदेश यात्रा और नौकरी मिलने की संभावनाओं पर असर पड़ सकता है।
कानूनी बचाव के लिए लोगों के पास कुछ विकल्प मौजूद हैं। अगर किसी को गिरफ्तारी का डर है, तो वे अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) के लिए आवेदन कर सकते हैं। अगर FIR गलत या बिना आधार के है, तो भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 482 के तहत हाई कोर्ट में इसे रद्द (Quashing) करवाने की अर्जी दी जा सकती है। महाराष्ट्र सरकार ने पहले भी 2020 के प्रदर्शनकारियों के खिलाफ केस वापस लिए थे, जिसे देखते हुए अब इस मामले में भी केस वापसी की मांग की जा रही है।
ताजा अपडेट के मुताबिक, 24 जुलाई 2026 को दिल्ली पुलिस ने जंतर मंतर जा रहे 200 से ज्यादा लोगों को प्रिवेंटिव कस्टडी में लिया। पुलिस ने साफ किया है कि दंगों में शामिल लोगों के पासपोर्ट रद्द करने की कोई योजना फिलहाल नहीं है। वहीं, दिल्ली हाई कोर्ट ने 23 जुलाई को केंद्र और पुलिस से CCTV फुटेज सुरक्षित रखने को कहा है और पुलिस द्वारा छात्रों के साथ किए गए व्यवहार पर जवाब मांगा है। दूसरी तरफ, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक मामलों के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का ऐलान किया है, लेकिन प्रदर्शनकारी शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर अड़े हुए हैं।