Delhi में CJP प्रदर्शनकारियों के खिलाफ डंडे लेकर उतरे युवक, पुलिस का समर्थन करने का दावा

Delhi: राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहा प्रदर्शन अब तनावपूर्ण होता जा रहा है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शनकारियों और अन्य समूहों के बीच टकराव की खबरे

Delhi: राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहा प्रदर्शन अब तनावपूर्ण होता जा रहा है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शनकारियों और अन्य समूहों के बीच टकराव की खबरें सामने आई हैं। ताजा मामले में कुछ युवक डंडे लेकर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ खड़े नजर आए, जिन्होंने खुद को दिल्ली पुलिस का समर्थक बताया है।

CJP के प्रवक्ता सौरभ दास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो साझा किया है। इस वीडियो में कुछ युवक हाथ में डंडे लिए हुए हैं और खुद को ‘सनातनी’ बता रहे हैं। वीडियो में ये युवक दावा कर रहे हैं कि दिल्ली में अब असली सिविल गुंडों का प्रवेश हुआ है। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब दिल्ली में शिक्षा प्रणाली और NEET-UG 2026 जैसी परीक्षाओं में जवाबदेही को लेकर माहौल काफी गर्माया हुआ है।

पिछले कुछ दिनों से दिल्ली में स्थिति काफी तनावपूर्ण रही है। 20 जुलाई को ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़पें हुई थीं, जिसमें पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया था। दिल्ली पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा कर्मियों पर हमला किया और वाहनों में तोड़फोड़ की, जिससे एक एसीपी भी घायल हो गए। पुलिस ने इस मामले में अज्ञात उपद्रवियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है।

दूसरी तरफ, ह्यूमन राइट्स वॉच और एमनेस्टी इंटरनेशनल जैसी संस्थाओं ने पुलिस द्वारा अत्यधिक बल प्रयोग की रिपोर्ट दी है। पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश मदन लोकुर ने बिना नाम वाले पुलिसकर्मियों द्वारा किए गए लाठीचार्ज को अवैध बताया है। इस पूरे विवाद पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि युवाओं का हित सरकार की प्राथमिकता है और उनके भविष्य को नुकसान पहुंचाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।

इस मामले में अब कानूनी मोड़ आ गया है। दिल्ली उच्च न्यायालय शुक्रवार को CJP के नेतृत्व वाले इन प्रदर्शनों की जांच की मांग वाली एक जनहित याचिका पर सुनवाई करेगा। वहीं, मुंबई में भी इस आंदोलन के समर्थन में प्रदर्शन हुए, जिसके बाद वहां 6 अगस्त तक निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है।