Delhi में CJP मार्च के दौरान घायल प्रदर्शनकारी अस्पताल से डिस्चार्ज, पैलेट गन के इस्तेमाल पर विवाद गहराया
Delhi: राजधानी दिल्ली में 20 जुलाई को हुए CJP के ‘संसद चलो मार्च’ के दौरान घायल हुए प्रदर्शनकारी शेख इरशाद मंसूरी चार दिन बाद अस्पताल से घर लौट आए हैं। उनके चेहरे और गर्दन में पैलेट धंसे हुए थे, जिन्हें सर्जर
Delhi: राजधानी दिल्ली में 20 जुलाई को हुए CJP के ‘संसद चलो मार्च’ के दौरान घायल हुए प्रदर्शनकारी शेख इरशाद मंसूरी चार दिन बाद अस्पताल से घर लौट आए हैं। उनके चेहरे और गर्दन में पैलेट धंसे हुए थे, जिन्हें सर्जरी के जरिए निकाला गया। इस घटना के बाद अब पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है।
इस मामले में दिल्ली पुलिस ने पैलेट गन चलाने की बात से साफ इनकार किया है। पुलिस का कहना है कि उनके पास ऐसी बंदूकें नहीं हैं और यह दावा पूरी तरह गलत है। साथ ही पुलिस ने यह भी कहा कि CJP ने इस मार्च के लिए कोई आधिकारिक अनुमति नहीं ली थी। दूसरी तरफ, RML और सफदरजंग अस्पताल की मेडिकल रिपोर्ट में कुछ घायलों को पैलेट और गनशॉट इंजरी होने की बात कही गई है।
घटना की गंभीरता को देखते हुए अब केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) ने जांच शुरू कर दी है। RAF पर पैलेट गन चलाने के आरोप लगे हैं, जिसके बाद वे वायरल वीडियो और अपनी मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) की समीक्षा कर रहे हैं। विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी घायल प्रदर्शनकारी से मुलाकात की और केंद्र सरकार पर ज्यादा बल प्रयोग करने का आरोप लगाया है।
इस बीच CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने एक वेबसाइट लॉन्च करने की घोषणा की है, ताकि लाठीचार्ज करने वाले पुलिसकर्मियों की पहचान की जा सके। वहीं एक चौंकाने वाले घटनाक्रम में उत्तराखंड पुलिस के कांस्टेबल शेर सिंह ने जंतर-मंतर पर अपना पुलिस बैज सौंपकर नौकरी छोड़ने का दावा किया है। पुलिस के मुताबिक, मानसून सत्र के दौरान संसद भवन और इंडिया गेट के पास धारा 163 BNSS लागू थी, जिसके तहत बिना अनुमति भीड़ जमा करना मना था।