Delhi में ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान पेलेट गन इस्तेमाल का विवाद, पुलिस ने नकारा दावा पर मेडिकल रिपोर्ट में चोटें
Delhi: राजधानी दिल्ली में 20 जुलाई 2026 को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान हुए हंगामे को लेकर विवाद बढ़ गया है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए उन पर पेलेट गन
Delhi: राजधानी दिल्ली में 20 जुलाई 2026 को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान हुए हंगामे को लेकर विवाद बढ़ गया है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए उन पर पेलेट गन से फायरिंग की गई, जबकि दिल्ली पुलिस और पीआईबी ने इन दावों को पूरी तरह गलत और भ्रामक बताया है। इस मामले में अब घायलों की मेडिकल रिपोर्ट और पुलिस के बयानों के बीच टकराव दिख रहा है।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पुलिस कार्रवाई के दौरान उन्हें गंभीर चोटें आईं। 19 साल के छात्र साहिल लोचब की दाहिनी आंख की रोशनी जाने का खतरा है और डॉक्टरों ने दृष्टि वापस आने की संभावना केवल 1 प्रतिशत बताई है। वहीं, शेख इरशाद मंसूरी नाम के एक युवक के शरीर से सर्जरी के दौरान पेलेट जैसी चीजें निकाली गई हैं, हालांकि एक पेलेट रक्त वाहिका के पास होने के कारण नहीं निकाला जा सका। एक स्पोर्ट्स रिपोर्टर ने भी अपने शरीर पर पेलेट जैसी चोटों का दावा किया है।
दूसरी तरफ दिल्ली पुलिस ने साफ किया है कि उनके पास पेलेट गन नहीं हैं और न ही इनका इस्तेमाल किया गया। पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने पत्थरबाजी की जिससे 118 पुलिसकर्मी घायल हुए। इस हिंसा की जांच के लिए पुलिस 250 से ज्यादा वीडियो फुटेज खंगाल रही है और पत्थरबाजी व अनाधिकृत ड्रोन चलाने के मामले में कई एफआईआर दर्ज की गई हैं। पीआईबी ने भी सोशल मीडिया पर चल रही इन खबरों को फर्जी बताया है।
हालांकि, इस मामले में एक अहम पहलू यह है कि रैपिड एक्शन फोर्स (RAF), जो सीआरपीएफ की इकाई है, के पास पेलेट गन होती हैं। प्रदर्शनकारियों ने आरएएफ पर भी पेलेट गन और शॉक बैटन इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है, लेकिन सीआरपीएफ की ओर से अभी इस पर कोई जवाब नहीं आया है। घायलों का इलाज एम्स, आरएमएल और लेडी हार्डिंग जैसे बड़े अस्पतालों में चल रहा है।