Delhi में निर्यातकों के हितों की रक्षा के लिए ‘चिंतन शिविर’ शुरू, ग्रीन ट्रेड बैरियर्स और FTAs पर होगी चर्चा
Delhi: राजधानी दिल्ली में सोमवार से दो दिनों का एक नेशनल वर्कशॉप शुरू हुआ है जिसे ‘चिंतन शिविर’ नाम दिया गया है। यह आयोजन पर्यावरण से जुड़े व्यापारिक नियमों (ग्रीन ट्रेड बैरियर्स) और फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स (F
Delhi: राजधानी दिल्ली में सोमवार से दो दिनों का एक नेशनल वर्कशॉप शुरू हुआ है जिसे ‘चिंतन शिविर’ नाम दिया गया है। यह आयोजन पर्यावरण से जुड़े व्यापारिक नियमों (ग्रीन ट्रेड बैरियर्स) और फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स (FTAs) पर केंद्रित है। इसमें सरकार और व्यापार जगत के विशेषज्ञ इस बात पर चर्चा कर रहे हैं कि जलवायु परिवर्तन से जुड़े नए नियम भारत के निर्यात की क्षमता को कैसे प्रभावित करेंगे।
यह वर्कशॉप 22 जून 2026 को IIFT भवन के नालंदा हॉल में शुरू हुई और 23 जून 2026 तक चलेगी। इसका मुख्य मकसद यह समझना है कि दुनिया भर में पर्यावरण और जलवायु को लेकर जो नए व्यापारिक नियम लागू हो रहे हैं, उनसे भारतीय सामानों की विदेशों में बिक्री पर क्या असर पड़ेगा। इसमें WTO के नियमों, कार्बन उत्सर्जन और जंगलों की कटाई से जुड़े व्यापारिक उपायों पर गहराई से बात की जा रही है ताकि भारत अपनी रणनीतियां तैयार कर सके।
इस आयोजन का नेतृत्व वाणिज्य विभाग (Department of Commerce), सेंटर फॉर WTO स्टडीज (CWS) और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेन ट्रेड (IIFT) मिलकर कर रहे हैं। वर्कशॉप में वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के साथ-साथ WTO के विशेषज्ञों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया है।
- डॉ. प्रीतम बनर्जी (हेड, सेंटर फॉर WTO स्टडीज) ने शुरुआती संबोधन दिया।
- ऋचा प्रकाश चौधरी (डिप्टी सेक्रेटरी, वाणिज्य विभाग) ने प्रतिभागियों का स्वागत किया।
- उज्ज्वल कुमार घोष (जॉइंट सेक्रेटरी, वाणिज्य विभाग) ने कहा कि भारत को पर्यावरण की प्रतिबद्धताओं और व्यापारिक हितों के बीच संतुलन बनाना होगा।
- WTO के एरिक विजस्ट्रोम और पूर्व चेयर আনোয়ার शेख जैसे अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने भी इसमें शामिल होकर अपनी राय साझा की।
इस पूरी चर्चा का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि भारतीय निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में किसी परेशानी का सामना न करना पड़े और भारत की मार्केट एक्सेस बनी रहे। इससे आने वाले समय में टिकाऊ व्यापार (Sustainable Trade) को बढ़ावा मिलेगा और भारतीय उत्पादों की ग्लोबल कॉम्पिटिटिवनेस बढ़ेगी।