Delhi में मेट्रो, फ्लाईओवर और स्लिप रोड से मिलेगी राहत, सेंट्रल विस्टा कॉरिडोर का काम शुरू

Delhi: राजधानी दिल्ली में सफर करने वालों के लिए अच्छी खबर है। शहर के ट्रैफिक को कम करने और कनेक्टिविटी सुधारने के लिए कई बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम शुरू हो गया है। इसमें सेंट्रल विस्टा मेट्रो कॉरिडोर, कालिंदी कुंज पर नई स्ल

Delhi: राजधानी दिल्ली में सफर करने वालों के लिए अच्छी खबर है। शहर के ट्रैफिक को कम करने और कनेक्टिविटी सुधारने के लिए कई बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम शुरू हो गया है। इसमें सेंट्रल विस्टा मेट्रो कॉरिडोर, कालिंदी कुंज पर नई स्लिप रोड और न्यू रोहतक रोड फ्लाईओवर जैसी योजनाएं शामिल हैं, जिससे लाखों लोगों का समय बचेगा और जाम से छुटकारा मिलेगा।

सेंट्रल विस्टा मेट्रो कॉरिडोर का काम 24 जून 2026 को सेंट्रल सेक्रेटेरिएट मेट्रो स्टेशन से शुरू हुआ। केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने इस प्रोजेक्ट का उद्घाटन किया। यह कॉरिडोर करीब 9.913 किलोमीटर लंबा होगा और इसमें 9 अंडरग्राउंड स्टेशन बनेंगे। इन स्टेशनों में शिवाजी स्टेडियम, इंडिया गेट, कर्तव्य भवन और भारत मंडपम जैसे मुख्य इलाके शामिल हैं। इस प्रोजेक्ट की कुल लागत 9,570.40 करोड़ रुपये है, जिसमें दिल्ली सरकार 2,337.24 करोड़ रुपये देगी। इसे 33 महीने में पूरा करने का लक्ष्य है। इससे करीब 60,000 सरकारी कर्मचारियों और आम यात्रियों को बड़ी सुविधा होगी।

कालिंदी कुंज के पास ट्रैफिक जाम को खत्म करने के लिए भी तैयारी चल रही है। ट्रैफिक पुलिस ने पीडब्ल्यूडी को 10 फुट चौड़ी स्लिप रोड बनाने का प्रस्ताव दिया है ताकि लेफ्ट टर्न लेने वाले वाहन बिना रुके निकल सकें। साथ ही, NHAI ने यहाँ एम्स फ्लाईओवर की तरह दो लूप फ्लाईओवर बनाने को मंजूरी दी है। इससे दिल्ली, नोएडा और फरीदाबाद के बीच आने-जाने वाले 5 से 6 लाख लोगों को काफी राहत मिलेगी।

न्यू रोहतक रोड पर भी जाम कम करने के लिए पीडब्ल्यूडी फ्लाईओवर की योजना बना रहा है। NHAI पंजाबी बाग अंडरपास से टिकरी बॉर्डर तक 18.5 किलोमीटर के हिस्से पर दो चरणों में काम करेगा। पहले चरण में 341 करोड़ रुपये से सड़कों की मरम्मत होगी, जो 2026 तक पूरी हो जाएगी। दूसरे चरण में 1,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की लागत से सात क्रॉसिंग पर फ्लाईओवर बनाए जाएंगे ताकि रास्ता सिग्नल-फ्री हो सके। यह काम 2027 तक पूरा होने की उम्मीद है। सड़क खराब होने की मुख्य वजह जलभराव थी, जिसे रोकने के लिए अब ड्रेनेज का काम भी किया जा रहा है।