Delhi के Central Ridge में लगाए गए 50% पेड़ इलाके के लिए अनुपयुक्त, एक्सपर्ट्स ने उठाए सवाल
Delhi: राजधानी दिल्ली के सेंट्रल रिज में पिछले चार सालों में लगाए गए करीब आधे पेड़ इस इलाके की जमीन और पर्यावरण के हिसाब से सही नहीं हैं। इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि वन विभाग ने कुल 22 प्रजातियों क
Delhi: राजधानी दिल्ली के सेंट्रल रिज में पिछले चार सालों में लगाए गए करीब आधे पेड़ इस इलाके की जमीन और पर्यावरण के हिसाब से सही नहीं हैं। इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि वन विभाग ने कुल 22 प्रजातियों के पेड़ लगाए थे, जिनमें से केवल सात ही इस इलाके के लिए सही पाए गए।
रिपोर्ट के मुताबिक, लगाए गए पेड़ों में से नौ प्रजातियां रिज ईकोसिस्टम के लिए अनुपयुक्त हैं, जिनमें तीन बाहरी प्रजातियां भी शामिल हैं। छह अन्य प्रजातियां ऐसी हैं जो मूल रूप से यहां नहीं पाई जातीं और उन्हें जिंदा रखने के लिए लगातार पानी और खाद की जरूरत होगी। पर्यावरण एक्सपर्ट प्रदीप कृष्ण ने कहा कि विभाग को इस बात की सही समझ नहीं है कि कौन सा पेड़ यहां के लिए सही है। उन्होंने यह भी चिंता जताई कि कई पेड़ सिंचाई बंद होते ही सूख जाते हैं।
दूसरी तरफ, दिल्ली वन और वन्यजीव विभाग ने कहा कि वे दक्षिणी रिज में वैज्ञानिक तरीके से और स्थानीय प्रजातियों के पेड़ लगा रहे हैं। विभाग ने बताया कि अरावली रेस्टोरेशन प्लान के तहत असोला भाटी वन्यजीव अभयारण्य और आसपास के इलाकों में 10 लाख से ज्यादा देसी पेड़ लगाए जाएंगे। इसके अलावा, विभाग ने 120 हेक्टेयर सेंट्रल रिज और 600 हेक्टेयर दक्षिणी रिज से विदेशी ‘विलायती कीकर’ को हटाने का काम शुरू किया है।
पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने इस काम में भारी मशीनों और JCB के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि इससे जमीन की ऊपरी परत और मिट्टी की सेहत को नुकसान पहुंच रहा है। विभाग ने यह भरोसा दिया है कि लगाए गए पौधों की जियो-टैगिंग की जाएगी और उनकी जानकारी पोर्टल पर डाली जाएगी ताकि आम लोग भी इसकी जांच कर सकें।