Delhi के सेंट्रल रिज में मिलीं रहस्यमयी नक्काशी, वैज्ञानिकों की जांच के बाद खुलेगा राज

Delhi: राजधानी के सेंट्रल रिज इलाके में पत्थरों पर कुछ ऐसी आकृतियां मिली हैं जिन्होंने विशेषज्ञों को हैरान कर दिया है। जैव-विविधता की स्टडी करने गए दो पर्यावरणविदों ने पोलो ग्राउंड के पास क्वार्टजाइट की एक चट्टान पर ये र

Delhi: राजधानी के सेंट्रल रिज इलाके में पत्थरों पर कुछ ऐसी आकृतियां मिली हैं जिन्होंने विशेषज्ञों को हैरान कर दिया है। जैव-विविधता की स्टडी करने गए दो पर्यावरणविदों ने पोलो ग्राउंड के पास क्वार्टजाइट की एक चट्टान पर ये रहस्यमयी नक्काशी देखी। अब इस खोज के बाद यह जानने की कोशिश की जा रही है कि ये आकृतियां कितनी पुरानी हैं और इन्हें किसने बनाया था।

पर्यावरणविद् Pradeep Krishnan और Chetan Agarwal जब इलाके में प्रकृति का दस्तावेजीकरण कर रहे थे, तब उनकी नजर इन आकृतियों पर पड़ी। इन नक्काशी में सीढ़ी जैसे पैटर्न और कप की तरह गोल गड्ढे बने हुए हैं। पुरातत्वविद् Dr. Banani Bhattacharya का मानना है कि यह खोज दिल्ली रिज के पुरातात्विक महत्व की ओर एक नया इशारा करती है।

वहीं पुरातत्वविद् Dr. Sanjeev Kumar Singh ने बताया कि अरावली दुनिया की सबसे पुरानी पर्वत श्रृंखलाओं में से एक है, इसलिए यहां चट्टानों पर ऐसी आकृतियां मिलना कोई अजीब बात नहीं है। उन्होंने साफ किया कि जब तक वैज्ञानिक डेटिंग और विस्तृत जांच नहीं हो जाती, तब तक इनकी उम्र या इस्तेमाल के बारे में कोई भी पक्का दावा नहीं किया जा सकता।

इस खोज के बाद विशेषज्ञों ने मांग की है कि रिज क्षेत्र को केवल वन संरक्षण ही नहीं, बल्कि पुरातात्विक संरक्षण भी दिया जाए ताकि ऐसे सबूत सुरक्षित रहें। बता दें कि दिल्ली सरकार ने 15 मई, 2026 को भारतीय वन अधिनियम, 1927 की धारा 20 के तहत सेंट्रल रिज के करीब 670 हेक्टेयर क्षेत्र को ‘आरक्षित वन’ घोषित किया था। अब इस इलाके में वैज्ञानिक और पुरातात्विक जांच की तैयारी की जा रही है।